अमजद खान फिल्मी परिवार में पैदा हुए थे। बचपन से ही उन्हें एक्टिंग का शौक था। बतौर बाल कलाकार उन्होंने 11 साल की उम्र में 1951 में रिलीज हुई फिल्म ‘नाजनीन’ में काम किया था। उन्हें असली पहचान 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ से मिली। इस फिल्म में बतौर विलेन हिंदी सिनेमा के वह हीरो बन गए। घर घर में वह ‘गब्बर सिंह’ के नाम से जाने जाने लगे। कितने आदमी थे, जो डर गया समझो मर गया और तेरा क्या होगा जैसे उनके डायलॉग मशहूर हुए थे।
अमजद खान को चाय पीने की लत थी। शोले की शूटिंग के दौरान वह रोजाना करीब 80 कप चाय पी जाया करते थे। इतना ही नहीं उनसे जुड़ा एक किस्सा बेहद मशहूर है। पृथ्वी थिएटर की कैंटीन स्टाफ अमजद खान की चाय की डिमांड को पूरा नहीं कर पाते थे, क्योंकि उन्हें दूध लेने दूर जाना पड़ता था। ऐसे में अमजद खान ने थिएटर में दो भैंसे बांधवा दी थी। ताकि कैंटीन स्टाफ को दूध लेने बाहर न जाना पड़े और उन्हें समय पर चाय मिलती रहे।
अमजद खान ने शेहला से शादी की थी। उनकी शादी का किस्सा बेहद मशहूर है। एक बार जब अमजद शेहला के पास गए तो उनसे पूछा क्या तुम जानती हो तुम्हारे नाम का मतलब क्या है। शेहला ने कहा नहीं। उन्होंने कहा इसका मतलब होता है डार्क आंखें। इसके बाद अमजद ने उनसे पूछा, तुम्हारी उम्र क्या है? तो शेहला ने जवाब दिया 14 साल। यह सुनकर अमजद ने कहा जल्दी बड़ी हो जाओ, मुझे तुमसे शादी करनी है। शेहला जब 11वीं क्लास में थी तब अमजद की मां उनके घर शादी का रिश्ता लेकर गईं थीं।
दरअसल, 1986 में फिल्म ‘दि ग्रेट गैम्बलर’ की शूटिंग के लिए अमजद खान मुंबई से गोवा जा रहे थे। रास्ते में उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया। इस एक्सीडेंट में कार की स्टेरिंग अमजद के अंदर 13 पसलियां तोड़ते हुए घुस गई। जिसके बाद वह कुछ समय तक कोमा में चले गए थे। वह रिकवर तो हो गए लेकिन लंबे समय तक व्हील चेयर पर रहने से वजन बढ़ने लगा। लेकिन 1994 में 27 जुलाई को उन्होंने 52 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया।