संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नह्यान की 19 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली भारत की आधिकारिक यात्रा दोनों देशों के बीच गहराते ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा न केवल कूटनीतिक शिष्टाचार है, बल्कि यह “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” (Comprehensive Strategic Partnership) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक ठोस प्रयास है।
कूटनीतिक महत्व और निरंतरता
यह शेख मोहम्मद बिन जायद की राष्ट्रपति बनने के बाद तीसरी और पिछले एक दशक में पांचवीं भारत यात्रा है। यह बार-बार होने वाले उच्च-स्तरीय दौरे दर्शाते हैं कि भारत की ‘एक्ट वेस्ट’ नीति और यूएई की ‘लुक ईस्ट’ नीति एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं। इससे पहले 2024 और 2025 में अबू धाबी और दुबई के क्राउन प्रिंस भी भारत का दौरा कर चुके हैं, जो रिश्तों की निरंतरता को पुख्ता करता है।
आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी
भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब $100 बिलियन (लगभग 8.3 लाख करोड़ रुपये) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुका है। इस यात्रा के दौरान निम्नलिखित आर्थिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित रहने की उम्मीद है:
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CEPA का विस्तार: व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के लागू होने के बाद व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। अब इसे नए क्षेत्रों जैसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) तक ले जाने पर चर्चा होगी।
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स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS): दोनों देश डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए रुपये और दिरहम में व्यापार करने की प्रणाली को और मजबूत कर रहे हैं।
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निवेश: यूएई भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और खाद्य पार्कों में भारी निवेश करने का इच्छुक है।
ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग
यूएई भारत के लिए कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है।
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ऊर्जा: पारंपरिक तेल व्यापार से आगे बढ़ते हुए अब दोनों देश हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
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रक्षा: हाल ही में अबू धाबी में आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डेजर्ट साइक्लोन-II’ ने रक्षा संबंधों को नई मजबूती दी है। इस दौरे में रक्षा औद्योगिक सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत हथियारों के संयुक्त उत्पादन पर भी बातचीत हो सकती है।
क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक भू-राजनीति
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मध्य-पूर्व (वेस्ट एशिया) में भू-राजनीतिक अस्थिरता है।
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ईरान-अमेरिका तनाव, गाजा संकट और लाल सागर में सुरक्षा चुनौतियों पर दोनों नेता अपने विचार साझा करेंगे।
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भारत और यूएई I2U2 (भारत, इजरायल, यूएई, अमेरिका) और BRICS जैसे समूहों में भी सक्रिय भागीदार हैं, जो वैश्विक मंच पर उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
सांस्कृतिक और मानवीय संबंध
यूएई में लगभग 35 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं, जो वहां की कुल आबादी का करीब 35% हिस्सा हैं। यह प्रवासी भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक जीवित पुल का काम करता है। राष्ट्रपति अल नह्यान का यह दौरा इस विश्वास को और गहरा करता है कि भारत केवल एक व्यापारिक भागीदार नहीं, बल्कि यूएई का एक भरोसेमंद “रणनीतिक भाई” भी है।
निष्कर्ष:
शेख मोहम्मद बिन जायद अल नह्यान की यह यात्रा केवल समझौतों तक सीमित नहीं है; यह साझा विजन और आपसी भरोसे का प्रतीक है। जिस तरह से यूएई के राष्ट्रपति की शाही जीवनशैली और उनकी अथाह संपत्ति चर्चा का विषय बनी रहती है, उसी तरह उनकी यह भारत यात्रा दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व के बीच एक मजबूत आर्थिक गलियारा बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।