संसदीय समिति का आधिकारिक कार्यक्रम और उद्देश्य
रक्षा मामलों की 31-सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति आज, 23 जनवरी 2026 को अयोध्या के दौरे पर है। इस उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह हैं। आधिकारिक तौर पर इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अयोध्या के छावनी क्षेत्र (केंटोनमेंट एरिया) का निरीक्षण करना और वहां चल रही रक्षा परियोजनाओं तथा बुनियादी ढांचे की समीक्षा करना है। समिति के कार्यक्रम में स्थानीय सैन्य अधिकारियों के साथ बैठकें और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेना शामिल है। हालांकि, इस दौरे का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहलू भी है, जिसमें समिति के अधिकांश सदस्यों का नवनिर्मित राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन करने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
राहुल गांधी की उपस्थिति पर बना संशय
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी इस रक्षा समिति के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। तकनीकी रूप से उनका नाम उन सांसदों की सूची में शामिल है जिन्हें इस दौरे पर अयोध्या पहुंचना था। पिछले कई दिनों से मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज थी कि क्या राहुल गांधी इस बार अपनी पार्टी की पुरानी दूरियों को खत्म कर राम मंदिर जाएंगे। हालांकि, कांग्रेस सूत्रों और स्थानीय प्रशासन से प्राप्त नवीनतम जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी ने इस यात्रा के लिए अपनी औपचारिक सहमति नहीं दी है। उनके आधिकारिक प्रोटोकॉल में राम मंदिर दर्शन का कोई स्पष्ट उल्लेख न होने के कारण उनके इस दौरे में शामिल होने पर सस्पेंस बना हुआ है।
कांग्रेस पार्टी और राज्य इकाई का आधिकारिक पक्ष
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी का रामलला के दर्शन के लिए फिलहाल कोई पूर्व-निर्धारित निजी कार्यक्रम नहीं है। पार्टी का तर्क है कि जब तक मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो जाता और धार्मिक दृष्टिकोण से शंकराचार्य इसे पूर्ण घोषित नहीं कर देते, तब तक वहां की यात्रा आस्था से अधिक राजनीतिक प्रतीत होती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी एक “तपस्वी” की भांति अपनी यात्राओं के माध्यम से जनता से जुड़ रहे हैं और वह उचित समय आने पर ही अयोध्या जाएंगे। पार्टी ने इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बताते हुए कहा है कि किसी भी सांसद को समिति के साथ दर्शन करने से रोका नहीं गया है।
प्रशासनिक तैयारियां और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती (पराक्रम दिवस) और वसंत पंचमी के पावन अवसर को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए गए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया है क्योंकि वीआईपी संसदीय समिति के आगमन के साथ-साथ आज लाखों की संख्या में श्रद्धालु भी सरयू स्नान और दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय अधिकारियों ने समिति के सदस्यों के स्वागत और सुगम दर्शन के लिए विशेष गलियारे तैयार किए हैं। यदि राहुल गांधी अंतिम समय पर इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने का निर्णय लेते हैं, तो उनके लिए जेड प्लस (Z+) श्रेणी की सुरक्षा के तहत अलग से प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।
यात्रा का राजनीतिक महत्व और रणनीतिक निहितार्थ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह संभावित दौरा या इससे दूरी बनाना, दोनों ही 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए बड़े संकेत हैं। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा समारोह के निमंत्रण को अस्वीकार करने के बाद से भाजपा लगातार कांग्रेस को “हिंदू विरोधी” छवि में घेरने का प्रयास करती रही है। ऐसे में यदि राहुल समिति के साथ मंदिर जाते हैं, तो इसे कांग्रेस की सॉफ्ट-हिंदुत्व की रणनीति और डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जाएगा। इसके विपरीत, यदि वह फिर से दूरी बनाए रखते हैं, तो सत्तारूढ़ दल इसे उनकी वैचारिक हठधर्मिता और बहुसंख्यक समाज की भावनाओं के प्रति उदासीनता के रूप में प्रचारित कर सकता है।
मंदिर ट्रस्ट और संतों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों और अयोध्या के संतों के बीच राहुल गांधी के संभावित आगमन को लेकर विविध मत हैं। ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने पुष्टि की है कि संसदीय समिति के आगमन की सूचना है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से राहुल गांधी के दर्शन के लिए कोई अलग से जानकारी नहीं मिली है। अयोध्या के कुछ संतों ने राहुल गांधी के मंदिर आने का स्वागत किया है, उनका कहना है कि रामलला के द्वार सभी के लिए खुले हैं। वहीं, कुछ अन्य धर्माचार्यों ने कांग्रेस के पुराने रुख की आलोचना करते हुए कहा है कि दर्शन केवल श्रद्धा के लिए होने चाहिए, न कि संसदीय समितियों की आड़ में राजनीतिक लाभ लेने के लिए।