शिव पुराण से सीखें , कुछ खास गुण

धार्मिक ग्रंथ ना सिर्फ मनुष्य का अध्यात्म के साथ रिश्ता मजबूत करते हैं बल्कि यह जीवन की जटिलताओं को दूर…
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धार्मिक ग्रंथ ना सिर्फ मनुष्य का अध्यात्म के साथ रिश्ता मजबूत करते हैं बल्कि यह जीवन की जटिलताओं को दूर भी करते हैं। हिन्दू धर्म की बात करें तो इनमें दर्ज कथाएं और घटनाएं हमें हमारे पौराणिक इतिहास के विषय में बताने के साथ-साथ हमारे चरित्र और मन के शुद्धिकरण का काम भी करती हैं। लेकिन अगर हम इन्हें व्यवहारिक दृष्टिकोण से देखें तो ये आज भी मानव जाति के विकास में अपना योगदान देने में पूर्ण रूप से सक्षम हैं।

शिव पुराण-शिव पुराण, इसक संबंध केवल शिव भक्ति से नहीं है बल्कि इसमें ज्ञान, मोक्ष, कर्म आदि से जुड़ी कुछ ऐसी बातों का भी जिक्र है जिनसे मनुष्य जीवन को नई राह मिल सकती है। आज हम आपको शिव पुराण में दर्ज कुछ ऐसी ही बातें समझाने जा रहे हैं।

धन का संग्रह करना-मनुष्य को कभी गलत मार्ग पर जाकर धन संग्रह नहीं करना चाहिए। उसे अपने धन का विभाजन तीन भागों में करना चाहिए, जिसका एक भाग उसे खुद उपभोग करना चाहिए, एक भाग धन वृद्धि में और दूसरा धर्म-कर्म, दान-पुण्य में लगाना चाहिए।

क्रोध को त्यागना बेहतर-मनुष्य को कभे क्रोध के आवेग में नहीं आना चाहिए। साथ ही उसे कभी ऐसे बोल भी नहीं बोलने चाहिए जिनसे दूसरा व्यक्ति क्रोधित हो। क्रोध व्यक्ति के विवेक को पूरी तरह नष्ट कर देता है और उसके जीवन में समस्याओं का आगमन होने लगता है।

शिवरात्रि का व्रत-मनुष्य को शिवरात्रि के दिन भोजन नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति हर माह आने वाली शिवरात्रि का व्रत करता है उसे पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

संध्याकाल-संध्याकाल वह समय होता है जब रात और दिन एक दूसरे से मिल रहे होते हैं.. यह समय भगवान शिव का माना गया है। वे इस समय तीनों लोकों को देख रहे होते हैं। अगर व्यक्ति इस समय कटु शब्द कहता है, क्रोध करता है, सहवास करता है या उससे कोई पाप होता है तो वह पाप का भागी बनता है।

निष्काम भाव-जब व्यक्ति कोई कार्य करता है तो उसे स्वयं यह सोचना चाहिए कि क्या जो वो कर रहा है सही है। वह स्वयं अपने अच्छे और बुरे के लिए जिम्मेदार है। उसे ये बात नहीं सोचनी चाहिए कि कोई उसके कर्मों को नहीं देख रहा। उसे स्वार्थी होकर कोई कार्य नहीं करना चाहिए। क्योंकि आज नहीं तो कल, उसे अपने कर्मों का हिसाब देना ही होगा।

अनावश्यक इच्छाओं को त्यागना-मनुष्य जीवन की अधिकांश समस्याएं उसकी अनावश्यक इच्छाओं का ही परिणाम है। जब मनुष्य इच्छाओं के जाल में फस जाता है अब वह स्वयं अपनी खुशियों को नष्ट कर बैठता है।

मोह से मुक्ति-व्यक्ति के लिए मोह जाल में फसना सामान्य सी बात है, लेकिन एक समय उसकी यही आसक्ति उसके दुखों और असफलताओं को और ज्यादा बढ़ाने लगती है। व्यक्ति को हमेशा मोह के बंधन से मुक्त रहकर जीवन व्यतीत करने की कोशिश करनी चहिए।

विचारों की स्वच्छता-भगवान शिव का कहना है कि कल्पना आपके ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है, हमारी कल्पनाएं ही आगे चलकर हमारे कार्यों का रूप लेती हैं। मनुष्य को कल्पनाशील रहते हुए अपने विचारों को स्वच्छ रखना चाहिए।

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