“अंतरिक्ष क्षेत्र के इतिहास में 1 फरवरी के तारीख बहुत बड़े मोड़ के रूप में देखी जाती है. यह वह दौर था जब अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति रह गया था और वह अंतरिक्ष क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था. लेकिन एक फरवरी 2003 को सब कुछ बदल गया. अमेरिकी स्पेस एजेंस नासा ( US Space Agency NASA) का स्पेस शलट कोलंबिया (Columbia Space Shuttle) पृथ्वी पर वापस आते समय नष्ट हो गया था जिसमें भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला (Kalpana Chawla Death Anniversary) सहित सातों अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई थी.
चंडीगढ़ से नासा तक-इस हादसे ने नासा को अपने काम करने के तौर तरीके बदलने पर मजबूर कर दिया जो आज दुनिया भर में दिखाई दे रहा है. लेकिन इसे कल्पना चावाला के लिए भी ज्यादा याद किया जाता है. कल्पना का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल जिले में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई टैगोर बाल निकेतन में, चंडीगढ़ से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग और 1984 में अमेरिका के टेक्सस यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई हुई. मार्च 1995 में वे नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर टीम में और 1997 में अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान के लिए शामिल की गईं.
कल्पना और कोलंबिया अभियान-कोलंबिया हादसे वाली उड़ान कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा थी जो 16 जनवरी 2003 से शुरू हुई थी. जब अंतरिक्ष यान एक फरवरी 2003 को वापस धरती पर लौट रहा था तभी वह अचानक क्षतिग्रस्त हो गया जिसमें कल्पना चावला के साथ छह अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई थी.
दो साल तक कोई नया अभियान नहीं-1986 में चैलेंजर के बाद यह अमेरिका का दूसरा स्पेस शटल हादसा था. इसके बाद अमेरिका से अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना बंद कर दिया था. दो साल से भी ज्यादा समय तक कोई भी स्पेस शटल उड़ान नहीं भरी गई जब तक कोलंबिया हादसे की पड़ताल पूरी नहीं हुई. फिर नासा ने अपनी सुरक्षा में काफी बदलाव किए.
कुछ यात्री भी गए थे अंतरिक्ष-कम लोग जानते हैं कि कोलंबिया स्पेस शटल साल 2006 में फिर से शुरू हुआ था. उससे पहले 26 जुलाई 2005 के स्पेस शटल डिस्कवरी के जरिए सात अमेरिकी यात्री अंतरिक्ष में भेजे गए. इसके बाद 2007 में स्पेस शटल एंडोवर और साल 2011 में स्पेस शटल एटलांटिस, के जरिए यात्रियों को अंतरिक्ष भेजा गया.
2011 में दिखा असर-लेकिन ये अभियान केवल जरूरी होने की ही वजह से अंतरिक्ष में भेजे गए थे. एटलांटिस आखिरी क्रू युक्त यान था नासा ने अमेरिका से अंतरिक्ष में भेजा था. इससे बाद से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशनमें अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री रूसी सुयोज रॉकेट से भेजे जाने लगे थे. लेकिन 2011 से ही अमेरिका और नासा ने निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष में लोगों को ले जाने संबंधी शोध और निवेश को बढ़ावा देने का फैसला किया .नींव का काम कर गया फैसला-यही फैसला जो वास्तव में कोलंबिया हादसे की वजह से ही लिया गया था, आज अंतरिक्ष पर्यटन उद्योग के लिए नीव का काम कर गया. उसी साल से नासा ने भी खुद मानवीय अंतरिक्ष उड़ानों से तौबा की जिसके बाद साल 2020 अंतरिक्ष में सबसे पहले क्रू सदस्यीय उड़ान भरी जो कि एक निजी क्षेत्र के प्रक्षेपण यान से भरी गई.
2020 में दो अमेरिकी यात्रियों को सफलता पूर्वक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजा. यह अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी उद्योग का प्रवेश था जिसे कोलंबिया हादसे का सबसे बड़ा प्रभाव माना जाता है. इसी बीच स्पेसएक्स के अलावा कई निजी क्षेत्र की कंपनियों ने अंतरिक्ष पर्यटन को खंगालने पर काम जारी रखा हुआ जिसके बहुत सारे प्रयास साल 2022 में फलीभूत हुए. आज अंतरिक्ष पर्यटन भविष्य के बड़े उद्योग के रूप में देखा जा रहा है और भारत सहित अन्य देश भी निजी भागीदारी को प्रोत्साहित कर रहे हैं.