फ्रांस में रिटायरमेंट की उम्र को 62 से 64 साल करने का प्रस्ताव है. सरकार ऐसा करने जा रही है लेकिन कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं. सरकार के इस कदम के खिलाफ गुरुवार यानि 19 जनवरी को फ्रांस के सभी प्रमुख कर्मचारी संगठन धरना देने जा रहे हैं. पूरे देश में इन पेंशन सुधारों का विरोध हो रहा है.फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों की सरकार ने दलील दी है कि उम्र सीमा बढ़ाकर वह पेंशन सिस्टम को बचाना चाहती है. नई योजना के तहत सरकार ये काम 2030 से करना चाहती है. तब वह मौजूदा रिटायरमेंट की उम्र को 62 से बढ़ाकर 64 कर देगी.
वैसे कई देश इस तरह का काम करने जा रहे हैं और कुछ ने कर भी दिया है. अभी सबसे ज्यादा उम्र में रिटायर होने की उम्र अमेरिका में है, जहां ये उम्र 66 साल है. लेकिन वो भी इस उम्र को एक साल और बढ़ा सकता है. दरअसल पेंशन को ही लेकर दुनियाभर में ये कवायद जारी है.फ्रांस में पूरी पेंशन लेने के लिए नौकरी की न्यूनतम अवधि भी बढ़ाने पर विचार चल रहा है. ऐसा केवल इसलिए हो रहा है ताकि फ्रांस अपना बजट घाटा कम कर पाए. आने वाले सालों में फ्रांस में बड़े पैमाने पर लोग रिटायर होने जा रहे हैं. ये संख्या 2030 के आसपास और बढ़ सकती है. लेकिन सरकार के इस कदम पर जितना असंतोष वहां फैल चुका है, वो जरूर माक्रों सरकार के लिए एक सिरदर्द बन जाएगा.
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि सरकार के इस कदम से मध्यम वर्ग पर बोझ बढ़ेगा. उन्हें पूरी पेंशन पाने के लिए ज्यादा साल काम करना होगा. तब तक वह अपनी तनख्वाह से भारी टैक्स भरते रहेंगे. इन दिनों फ्रांस में महंगाई जबरदस्त तरीके से बढ़ रही है.दरअसल दुनियाभर में बदलती अर्थव्यवस्थाओं में पेंशन देना हर सरकार के लिए ना केवल टेढ़ी खीर है बल्कि वो किसी ना किसी तरह या तो इसे खत्म करना चाह रही हैं या इसे इस तरह बदलना चाह रही हैं कि उन पर इसका ज्यादा बोझ नहीं पड़े. इसे टालने के लिए सरकारें जिस तरह पूरे यूरोप में रिटायमेंट एज बढ़ा रही हैं. वो हैरान कर रही है.
ब्रिटेन और आयरलैंड ने क्या किया-ब्रिटेन और आयरलैंड ने तो भविष्य की रिटायरमेंट उम्र को बढ़ाकर 68 कर दिया है, जो काफी ज्यादा है, केवल यही नहीं इन सरकारों ने तो ये भी संकेत दिए हैं कि इस उम्र को भी वह और बढ़ा सकती हैं, इसका मतलब ये मानिए कि भविष्य में अगर देशों में रिटायरमेंट की उम्रसीमा 70 साल पर पहुंच जाए तो हैरान मत होइए.जिन और यूरोपीय देशों में रिटायरमेंट उम्र सबसे ज्यादा बढ़ाने का प्रस्ताव है, उसमें डेनमार्क, एस्तोनिया और इटली जैसे देश हैं. डेनमार्क इसे 65.5 वर्ष से बढ़ाकर 74 करना चाहता है तो एस्तोनिया 63.8 से 71 साल तो इटली में 67 से 71 करने का प्रस्ताव है.
जर्मनी में भी बढ़ रही है बूढ़ी आबादी-जर्मनी की आधिकारिक वेबसाइट में पिछले साल अगस्त में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वहां बूढ़ी होती आबादी, कामगारों की घटती संख्या और पेंशन फंड में कमी से जर्मनी में विस्फोटक स्थिति तैयार हो रही है. क्या इसका समाधान रिटायरमेंट की उम्र 70 साल करने से हो सकता है?
जर्मनी में वर्ष 2022 की पहली तिमाही में खाली पड़े पदों की संख्या अभूतपूर्व तरीके से बढ़ कर 1.74 लाख तक चली गई. 30 साल पहले जर्मनी के एकीकरण के बाद यह पहली बार हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियों के पद खाली हैं.इसके साथ ही जर्मनी में युवाओं की आबादी भी रिकॉर्ड स्तर पर कम है. संघीय सांख्यिकी विभाग के मुताबिक जुलाई में जर्मनी की कुल आबादी के महज 10 फीसदी लोग ही 15 से 24 साल के बीच की उम्र के हैं. इसके उलट 65 साल से अधिक उम्र वाले लोगों की तादाद 20 फीसदी से ज्यादा है.देश में बच्चों की जन्मदर उम्र में हुए बदलाव की तुलना में काफी कम है. इसका एक मतलब यह है कि पेंशन फंड पर भी काफी ज्यादा दबाव है. इसका एक समाधान यह है कि रिटायर होने की उम्र 70 साल कर दी जाए. फिलहाल जर्मनी धीरे धीरे उन लोगों की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल से 67 साल करने में जुटा है.
पेंशन फंड पर दबाव बढ़ा-हालांकि ज्यादातर विकसित देशों में लोग 18 से 21 वर्ष की उम्र तक काम शुरू करते हैं और 60-65 साल तक करते रहते हैं. लेकिन लोगों के रिटायर होने के बाद पेंशन फंड पर दबाव बढ़ रहा है और सरकारों के लिए इसे देना मुश्किल हो रहा है.
जीवन प्रत्याशा बढ़ी और बर्थ रेट घटी-लोगों की जीवन प्रत्याशा बढ़ गई है. वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट कहती है कि पिछले 30 सालों में ब्रिटेन में लोगों की उम्र 75 से 82 साल तक बढ़ गई है. लेकिन इससे सरकारों की समस्या ये बढ़ रही है कि काम करने वाले वर्करों की तुलना में रिटायर्ड लोगों की तादाद बढ़ने लगी है. साथ ही ज्यादातर यूरोपीय देशों में अब बर्थरेट घट भी रही है.
पश्चिमी देशों में हर महिला पर 2.1 बच्चों की जरूरत है जबकि 35 देशों जिसमें जापान, जर्मनी और स्पेन भी शामिल हैं, वहां बर्थरेट या हर महिला पर बच्चों की दर 1.5 या इससे भी कम है.एक और रिपोर्ट कहती है कि पिछले 50 सालों में जीवन प्रत्याशा 40 फीसदी बढ़ी है जबकि प्रजनन दर में 50 फीसदी की कमी आई है.
भारत में स्थिति-भारत में आमतौर पर लोगों की रिटायरमेंट एज 58-60 साल है. जिसे बढ़़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. हालांकि सरकार से पिछले दिनों इस तरह की मांग की गई कि उसे लोगों की रिटायरमेंट एज दो साल बढ़ा देनी चाहिए. भारत में पुरानी पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2004 को बंद कर दिया गया था. इसे राष्ट्रीय पेंशन योजना (National Pension Scheme) से बदल दिया गया था. पुरानी पेंशन योजना बहाली के लिए पूरे देश में राष्ट्रीय आंदोलन चलाया जा रहा है.पुरानी पेंशन योजना को दिसंबर 2003 में दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने खत्म कर दिया था. पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी को आखिरी वेतन की 50 फीसदी रकम पेंशन के तौर पर मिलती थी. इस पूरी राशि का भुगतान सरकार करती थी. इस पर समय समय पर भत्ते भी बढ़ते रहते थे.
वर्ष 1998 में भारत में रिटायरमेंट उम्र 58 से 60 की गई -भारत में सुप्रीम कोर्ट के जज की रिटायरमेंट उम्र 65 साल है जबकि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लिए ये उम्र 62 साल है. 60 के दशक में भारत में रिटायरमेंट की उम्र घटाकर 58 साल कर दी गई थी लेकिन फिर मई 1998 में सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के रिटायर होने की उम्र 58 से बढ़ाकर 60 कर दी गई. प्राइवेट सेक्टर में भी रिटायरमेंट की उम्र 58-60 वर्ष है.
नेपाल में 65 साल में होते हैं रिटायर बाकि एशियाई मुल्कों में 60 पर -इस्राइल में रिटायरमेंट उम्र 67 साल है तो एशिया के देशों में रिटायरमेंट की उम्र अमूमन 60 वर्ष है. अजरबैजान, हांगकांग में 65 साल. चीन, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और उजबेकिस्तान में 60-60 साल. श्रीलंका और पाकिस्तान में भी रिटायरमेंट एज यही है. बांग्लादेश में ये 59 साल है तो नेपाल में 65 साल. एशियाई देशों में भी अब लोग रिटायरमेंट की इस उम्र से कम से कम 10 साल आगे का एक्टिव रहते हैं और आमतौर पर फिट भी. उन्हें आर्थिक तौर पर रिटायरमेंट के बाद धन की जरूरत भी ज्यादा महसूस होती है.