मजिस्ट्रेट झिंटू बोरा और श्रम अधिकारी पीके मालाक समेत अधिकारियों की एक ने शुक्रवार को बगीचे का दौरा किया और मजदूरों को यह आश्वासन दिया कि वह इस मामले को जिला उपायुक्त के समक्ष उठाएंगे। स्थानीय पंचायत के प्रमुख राधेश्याम कुर्मी ने आरोप लगाया कि चाय बागान के अधिकारियों ने बुधवार की रात चुपके से तालाबंदी का नोटिस लगा दिया और परिसर से चले गए। उन्होंने कहा, गुरुवार को भुगतान का दिन था और अधिकारियों ने इस तरह से पलायन कर लोगों को आक्रोशित किया है।
स्थानीय पंचायत के प्रमुख राधेश्याम कुर्मी ने आरोप लगाया कि चाय बागान के अधिकारियों ने बुधवार की रात चुपके से तालाबंदी का नोटिस लगा दिया और परिसर से चले गए। उन्होंने कहा, गुरुवार को भुगतान का दिन था और अधिकारियों ने इस तरह से पलायन कर लोगों को आक्रोशित किया है। कुर्मी ने यह भी आरोप लगाया कि मजदूरों को सरकारी दर से कम दैानिक मजदूरी मिलती है और महिला श्रमिकों को प्रतिदिन अनिवार्य से अधिक चाय पत्ती तोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने दावा किया, अब हमारे पास अपनी शिकायतों को दूर करने वाला कोई नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कृषि और वन विभागों पर व्यक्त की नाराजगी-असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने किसानों के बीच उनके लाभ के लिए सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने में पीछे रहने पर कृषि और वन विभागों पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के साथ दो मंडलों को गांव और कलस्टर स्तर पर किसानों तक पहुंचना चाहिए, ताकि उन्हें विभिन्न राज्य और केंद्रीय योजनाओं से अवगत कराया जा सके।
तीन दिवसीय सातवें असम कृषि-वानिकी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा, पिछले एक वर्ष में किसानों के लिए सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। लेकिन, मुझे लगता है कि हमारे कृषि और वन विभाग लोगों तक इन बातों को पहुंचाने में पिछड़ रहे हैं।