कारगिल युद्ध में मैनपुरी के पांच वीर सपूत देश की खातिर कुर्बान हो गए थे। शौर्य और पराक्रम से उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों के छक्के छुड़ा दिए थे। उनके गांवों में बने वीर स्थल वीर गाथा की कहानी बयां कर रहे हैं। कारगिल युद्ध को आज 23 साल हो चुके हैं, लेकिन शहीदों की यादों को जिले के लोग भुला नहीं पा रहे हैं। युद्ध में जिले के गांव अंजनी निवासी प्रवीन यादव, शाहजहांपुर निवासी सत्यदेव यादव, गढ़िया घुटारा निवासी मुनीष यादव, नगला आंध्रा निवासी हेमचरन यादव और किशनी के दिवनपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन ने शहादत पाई थी। 
मुनीष- कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए बेवर के गांव गढ़िया घुटारा के ग्रेनेडियर सिपाही मुनीष कुमार तीन जून को शहीद हो गए थे। गांव में बना स्मारक उनकी शहादत की याद दिलाता है। शहीद की पत्नी मंजू देवी वर्तमान में भरथना में बच्चों के साथ रहकर गैस एजेंसी का संचालन करती हैं। मंजू का कहना है कि अधिकारियों को साल में एक दिन शहीदों के परिजन की खबर लेनी चाहिए। शहीद के दोनों बेटे चंद्रशेखर और शशांक बीटेक की पढ़ाई पढ़ रहे हैं।
अंजनी के प्रवीन – गांव अंजनी के ग्रेनेडियर सिपाही प्रवीन कुमार ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए तीन जून को शहादत पाई थी। प्रवीन ने शहीद होने से पहले कई पाक जवानों को मार गिराया था। उनके गांव अंजनी में बना शहीद स्मारक शौर्य गाथा का बखान कर रहा है। शहीद की पत्नी सुमन यादव प्रवीन गैस एजेंसी का संचालन कर रही हैं।
अमरुद्दीन ने का करारा जवाब – किशनी विकास खंड के गांव दिवन्नपुर साहिनी के ग्रेनेडियर हवलदार अमरुद्दीन दुश्मनों को करारा जवाब देते हुए तीन जुलाई को देश की सेवा करते हुए देश के लिए कुर्बान हो गए। उनका स्मारक वर्ष 2020 में बन सका। उनकी पत्नी मोमना बेगम का कहना है कि पति ने देश सेवा के लिए जान न्यौछावर की अब बेटा समाज सेवा में सहयोग कर रहा है।
हेमचरन का बलिदान- कुरावली विकास खंड के गांव नगला आंध्रा निवासी सिपाही हेमचरन सिंह ने 23 जुलाई को कई पाक सैनिकों को मार गिराने के बाद देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनकी पत्नी संगीता की 12 वर्ष पूर्व शिकोहाबाद में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। एक पुत्र तथा एक पुत्री है। बेटी शिल्पी नोएडा के कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है, बेटा शुभम बीएससी कर रहा है।
24 जुलाई को सत्यदेव ने पाई थी शाहदत -घिरोर विकास खंड के गांव शाहजहांपुर के पैरानायक सत्यदेव सिंह ने 24 जुलाई 1999 को देश के लिए प्राणों की आहुति दे दी थी। उन्होंने 18 पाक घुसपैठियों को मार गिराया था। गांव में उनका स्मारक उनकी वीरता की कहानी सुनाता नजर आता है। गांव के लोगों को सत्यदेव की वीरता वर गर्व है।