मटके के ,पानी में है, अमृत

  सच में, मटके के पानी में हैं बड़े गुण, जिन्हें जानकर चौंक जाएंगे.. ● आयुर्वेद में मटके के पानी…
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सच में, मटके के पानी में हैं बड़े गुण, जिन्हें जानकर चौंक जाएंगे..
● आयुर्वेद में मटके के पानी को शीतल, हल्का, स्वच्छ और अमृत के समान माना गया है।
● यह प्राकृतिक जल का स्रोत है जो ऊष्मा से भरपूर होता है और शरीर की गतिशीलता को बनाए रखता है।

● मटके की मिट्टी कीटाणुनाशक होती है जो पानी में से दूषित पदार्थों को साफ करने का काम करती है।
● इस पानी को पीने से थकान दूर होती है।
● इसे पीने से पेट में भारीपन की समस्या भी नहीं होती।
● रक्त बहने की स्थिति में मटके के पानी को चोट या घाव पर डालने से खून बहना बंद हो जाता है।
● सुबह के समय इस पानी के प्रयोग से हृदय व आंखों की सेहत दुरुस्त रहती है।
● गला, भोजन नली और पेट की जलन को दूर करने में मटके का पानी काफी उपयोगी होता है।

परहेज़ बरतें
● जिन लोगों को अस्थमा की समस्या हो वे इस पानी का प्रयोग न करें क्योंकि
●इसकी तासीर काफी ठंडी होती है जिससे कफ या खांसी बढ़ती है।
●जुकाम, पसलियों में दर्द, पेट में आफरा बनने की स्थिति व शुरुआती बुखार के लक्षण होने पर मटके का पानी न पिएं।
●तली-भुनी चीजें खाने के बाद यह पानी न पिएं वर्ना खांसी हो सकती है।

मटके का रख रखाव (सावधानी)
●मटके का पानी रोजाना बदलें।
●लेकिन इसे साफ करने के लिए अंदर हाथ डालकर घिसे नहीं वर्ना इसके बारीक छिद्र बंद हो जाते हैं और पानी ठंडा नहीं हो पाता।

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