खुद पर भरोसा रखें और विश्वास करें
1. हमेशा आनंद (खुश) रहे “मानसिक टेन्शन अनेक बीमारियों को आमंत्रित करता है। गलत विचार न करें।
2. खाने बैठे तब ईश्वर का हिस्सा अवश्य निकाले जिससे शेष हिस्सा प्रसाद बन जायेगा।
3. खाना खाने के बाद कभी भी टहलने न जाये। खाने से पहले या जल्दी सुबह नंगे पांव घास या रेत में चले।
4. व्यायाम, प्राणायाम, योग, आसन आदि शरीर की सहुलियत के अनुसार दस / पंद्रह मिनट करें। प्रतियोगिता में ज्यादा व्यायाम न करें।
5. हफ्ते में / पन्द्रह दिन एक दिन नींबू पानी और फल पर व्रत करें। “लंघनम् परम् औषधम् ।
6. रात को संतुष्टि हो उतना खाये। भोजन कभी भी ज्यादा न खाये।
7. जहां तहां मत खाये, जिस किसी का भी न खाये, जब चाहे तब न खाये, जैसा तैसा मत खाये।
8. मनुष्य द्वारा पकाया भोजन नहीं बल्कि ईश्वर द्वारा पकाया हुआ भोजन ही इन्सान को खाना चाहिए। आग के पके भोजन से जीवनी शक्ति कम होती है।
9. देने से कम होता नहीं, बढ़ता है। सम्पन्नता देने में है अतः हमेशा राजा बने, मांगनहार नहीं।
10. सुख देने से सुख मिलता है, दुःख अपनाने से दुःख भागता है।
11. पकाया आहार मृत है, कच्चा अमृत है |
12. कच्चा ही सच्चा, पकाया हुआ दुर्गंध युक्त
13. दवाई में स्वास्थ्य नहीं, राहत है। स्वास्थ्य को हानि पहुंचाने वाली है।
14. व्रत उत्तम है। पकाया हुआ खाना बिगड़ा हुआ है।
15. दवाई, दूध, दारू, तम्बाकू, शक्कर अनेक रोग उत्पन्न करते हैं।