आज ही के दिन यानि 20 सितंबर 1933 में एनी बेसेंट का चेन्नई के पास 86 साल की उम्र में निधन हो गया. उनका जन्म तो लंदन में हुआ था . लेकिन आकर रहीं भारत में. कहा जा सकता है कि जब अंग्रेजों के दौर में गुलाम भारत राजनीतिक तौर पर सो रहा था तो उन्होंने इसे जगाया. इस देश में उनके काम के कारण देश के लोग उन्हें प्यार से मां वसंत कहने लगे तो महात्मा गांधी ने वसंत देवी की उपाधि दे डाली.
एनी बेसेंट का जन्म 01 अक्टूबर 1847 के दिन लंदन में हुआ था. भारत की मिट्टी से उन्हें खासा लगाव था. ब्रिटिश राज में जिस तरह कई बार उन्होंने विरोध की आवाज बुलंद की, उसने उन्हें ‘आयरन लेडी’ की छवि भी दी. वह भारतीय दर्शन एवं हिन्दू धर्म से बहुत प्रभावित थीं. वह भारत को अपना घर कहती थीं. वह हमेशा कहती थीं कि वेद और उपनिषद का धर्म ही सच्चा मार्ग हैं.
उनका बचपन गरीबी में बिता. लेकिन अद्भुत प्रतिभा की धनी थीं. कई भाषाओं की जानकार. 1867 को एनी बेसेंट का विवाह 22 वर्ष की उम्र में गिरजाघर के पादरी ‘रेवेरेंड फ्रैंक बेसेंट’ से हुआ. लेकिन स्वाभाव के खुले विचार के होने के कारण पति से उनका विरोध रहता था. इसी वजह से उन्होंने पति से संबंध तोड़कर मानवता से नाता जोड़ने का संकल्प लिया.
ईश्वर, बाइबिल और ईसाई धर्म पर से उनकी आस्था डिग गई. धर्म के खिलाफ लेख लिखने पर मुक़दमा चला. भारत में रहते हुए उन्होंने खुद को कभी विदेशी नहीं समझा. हिन्दू धर्म पर व्याख्यान से पूर्व वह ‘ॐ नम: शिवाय’ का उच्चारण करती थीं. मेम साहब कहलाना पसंद नहीं करती थी.
एनी बेसेंट को अम्मा’ नाम उन्हें पसंद था. भारत से उन्होंने प्रेम किया. भारत में वो लोगों की सेवा में जुटी रहती थीं, उसी के चलते भारतवासियों ने उन्हें ‘माँ बसंत’ कहना शुरू कर दिया. चूंकि उन्होंने भारत की आजादी में भी काफी योगदान दिया था लिहाजा गांधीजी सम्मान से उन्हें वसंत देवी कहने लगे.
जो प्रण वो अपने संस्था के लिए लोगों से कराती थीं
एनी बेसेंट ने जो संस्था बनाई थी, उसके प्रण के बारे में जानकर आज भी हैरानी होती है कि उन्होंने तब कितना क्रांतिकारी काम किया था. किस तरह भारतीय समाज को बदलने में भूमिका अदा की थी. इस संस्था में शामिल होने के लिए लोगों को इन बातों को मानते हुए शपथ पत्र पर साइन करने होते थे
. मैं जात पात पर आधारित छुआछूत नहीं करुंगा
. मैं अपने बेटों का विवाह 18 वर्ष से पहले नहीं करुंगा
. मैं अपनी बेटियों का विवाह 16 वर्ष से पहले नहीं करुंगा
. मैं पत्नी, पुत्रियों और कुटुम्ब की अन्य स्त्रियों को शिक्षा दिलाऊंगा. कन्या शिक्षा का प्रचार करूंगा. स्त्रियों की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करुंगा.
. मैं जन साधारण में शिक्षा का प्रचार करुंगा
. मैं सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन में वर्ग पर आधारित भेद-भाव को मिटाने का प्रयास करुंगा
. मैं सक्रिय रूप से उन सामाजिक बन्धनों का विरोध करुंगा, जो विधवा स्त्री के सामने आते हैं जब वह पुनर्विवाह करती हैं
. मैं कार्यकर्ताओं में आध्यात्मिक शिक्षा एवं सामाजिक और राजनीतिक उन्नति के क्षेत्र में एकता लाने का प्रयत्न भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व व निर्देशन में करुंगा