थॉमस बाटा एक चेक-कनाडाई व्यापारी और उद्यमी थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय जूता कंपनी बाटा शूज़ की स्थापना की थी। थॉमस बाटा का जन्म 17 सितंबर 1914 को चेक गणराज्य के जिलीन कस्बे में हुआ था। उनके पिता जूता बनाने वाले साधारण कारीगर थे।जब थॉमस सिर्फ 17 साल के थे तब उनके पिता की एक हवाई दुर्घटना में पिता की मृत्यु हो गई। इसके बाद थॉमस ने ‘बाटिया’ उपनाम कर लिया । बाद में इसी के नाम पर उन्होंने अपनी कंपनी का नाम बाटा रखा।
अंतरराष्ट्रीय जूता कंपनी बाटा शूज़ की स्थापना की थी। उन्होंने अपने परिवार के व्यवसाय में शामिल होने से पहले स्विट्जरलैंड में इंजीनियरिंग और रसायन शास्त्र का अध्ययन किया।1939 में, द्वितीय विश्व युद्ध के भयानक हालत को देखते हुए बाटा कनाडा भाग गए और वहाँ पारिवारिक व्यवसाय की एक नई शाखा स्थापित की। उन्होंने 90 से अधिक देशों में संचालन और 70,000 से अधिक कर्मचारियों के कार्यबल के साथ कंपनी को एक वैश्विक फुटवियर साम्राज्य में विस्तारित किया। उनके नेतृत्व में, बाटा शूज़ असेंबली लाइन उत्पादन और आधुनिक प्रबंधन प्रथाओं के उपयोग सहित अपनी नवीन निर्माण तकनीकों के लिए जाना जाने लगा।
बाटा सामाजिक उत्तरदायित्व और सामुदायिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने उन समुदायों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य सामाजिक कारणों का समर्थन करने के लिए कई पहलें की स्थापना की जहां बाटा शूज संचालित होते थे। उन्होंने टोरंटो, कनाडा में बाटा शू म्यूज़ियम की भी स्थापना की, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े फुटवियर कलाकृतियों का संग्रह है और यह जूतों के इतिहास पर शोध और शिक्षा के केंद्र के रूप में कार्य करता है।
बाटा छोटा नाम होने के कारण बोहत लोकप्रियता मिली। प्रथम विश्वयूद्ध के समय जब कई कंपनी बंद
होने लगी थी तब बाटा ने अपने जूतों का दाम बोहत कम कर दिया जिसका नतीजा यह हुआ की बाटा को दस गुना कर्मचारियो को काम पर रखना पड़ा ।बाटा भारत की पहली ऐसी जिसे आईएसओ -9001 सर्टिफिकेशन मिया था ।
थॉमस ने समाजसेवा के लिए चैरिटेबल संगठन की स्थापना भी की। इसके अलावा वे बाटा शू फाउंडेशन के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने चेक गणराज्य में बाटा विश्वविद्यालय की भी स्थापना की है। युवाओं की शिक्षा के विकास के लिए उन्होंने अनेक सराहनीय प्रयास किए।बाटा को अपने पूरे जीवनकाल में कई सम्मान और पुरस्कार मिले, जिनमें ऑर्डर ऑफ कनाडा, कनाडा में सर्वोच्च नागरिक सम्मान और फ्रांस में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार लीजन डी’होनूर शामिल हैं। वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र की ओर से उन्हें पहले लाइफ टाइम अवॉर्ड से नवाजा गया।