आज से 27 साल पहले देश का पहला हृदय प्रत्यारोपण जुलाई 1994 में मानव अंग कानून बनने के बाद भारत के मशहूर डॉ पी वेणुगोपल की अगुआई में एम्स के 20 सर्जन की टीम ने किया था. यह बड़ी उपलब्धि उसी साल 3 अगस्त को हासिल की गई थी.वर्ष 1994 से पहले हृदय प्रत्यारोपण के लिए देश के जनता को विदेश जाना पड़ता था और औ भी आमिर लोग ही जा पाते थे ऐसे में वे लोग जो हृदय की आखरी स्टेज से जुज रहे होते उनके लिए इलाज का खर्च उठा पाना संभव नहीं होता था
दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए कानून 7 जुलाई 1994 को लागू हुआ था और इसके एक महीने के अंदर ही हृदय प्रत्यारोपण की उपलब्धि हासिल की गई. इस कानून में मनुष्य अंगों को निकलने, उनके भंडारण और प्रत्यारोपण के लिए प्रावधान हैं.
जब इस कानून को बनाने की प्रक्रिया शुरू थी उसी समय वेणुगोपाल और एम्स के कार्डियोथोरैकिक एंड वस्कुलर सर्जरी विभाग की उनकी पूरी टीम हृदय प्रत्यारोपण की तकनीकों पर काम करने में लगी हुई थी. इसके लिए उन्होंने जानवरों पर भी प्रयोग किए थे. रिपोर्ट्स के अनुसारर इस प्रत्यारोपण में 59 मिनट का समय लगा था.
देवीराम भारी वे मरीज थे जिनका हृदय प्रत्यारोपण किया गया था तब उनकी उम्र 40 साल की थी. और देवीराम भारी उद्योग का कर्मचारी थे उन्हें कार्डियोमायोपैथी की बीमारी थी उनका हृदय प्रत्यारोपण के लिए करीब तीन महीने पहले से एम्स में भर्ती किया गया था. उनका रक्त समूह एबी पॉजिटिव था जो सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता रक्त समूह होता है.
जब देवीराम भारी का हृदय प्रत्यारोपण होना था उस समय एक 35 साल की महिला की ब्रेन हैम्रेज से मौत हो गई थी जो अस्पताल में लाई गई थी. उस महिला के परिवार की अनुमति के बाद और देवीराम के पास भी कोई दूसरा रास्ता न होने के कारण हृदय प्रत्यारोपण पर सहमति बनी सकी थी. इसके बाद देवीराम 15 साल का जीवन और अधिक जिए थे जिसके बाद उनकी ब्रेन हैम्रेज से उनकी मृत्यु हो गई थी जिसका हृदय प्रत्यारोपण से कोई लेना देना नहीं था.