टोक्यो ओलिंपिक में भारत की उम्मीद हिमा दास, बनीं असम की DSP,

हिमा दास हमारे भारत देश की खेल एथलेटिक्स की एक धाविका है असम के नागौन जिले के धींग गांव में…
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हिमा दास हमारे भारत देश की खेल एथलेटिक्स की एक धाविका है असम के नागौन जिले के धींग गांव में रहने वाली हिमा दास का जन्म 9 जनवरी 2000 में हुआ था . उनके यहाँ परिवार धान की खेती करते थे और धान पर निर्भर था. हिमा दास ने हमें बताया था की उन्होने भी धान के खेतो में कई सालों तक काम किया. यहीं से उन्होंने अपने देश के लिए खेलने का सपना देखा. उनका यह सपना पूरा हुआ और उनके इस सपने को पूरा करने में एक शिक्षक ने उनको सयोग किया हालांकि हिमा दास की रूचि शुरू में  फुटबाल के खेल में थी , लेकिन उनके शिक्षक ने हिमा को एथलेटिक्स में जाने की सलाह दी. हिमा ने उनकी सलाह को मानी और आगे बड़ी . लेकिन हिमा जानती थी की मुश्किलें यहीं से शुरू होगी . उन्होंने गुवाहाटी में राज्य चैंपियनशिप में भाग लिया. यहां पर उन्हें कांस्य पदक मिला. इसके बाद एक और प्रतियोगिता में हिमा ने हिस्सा लिया


गरीब और साधारण परिवार से सबंध रखने वाली हिमा दास का करियर काफी मुस्किलो भरा रहा है हिमा ने न केवल 21 साल की उम्र में 5 गोल्ड मेडल हासिल कर अपने गांव ,देश और माता पिता नाम ऊंचा किया बल्कि अपने इस शंघर्ष से एक मिसाल कायम कर और उन लोगो के लिए प्रेरणा बनी जो गरीब और पैसो के कारण अपने सपनो को पूरा नहीं कर पाते है . 5 गोल्ड मेडल ये उन्होंने एक ही महीने के अंतर पर जीते थे . हिमा दास इस समय टोक्यो ओलिंपिक में अपनी जगह पक्की करने में कड़ी मेहनत कर रही हैं. उन्हें पूरी यकीन है कि वह टोक्यो ओलिंपिक में जाकर देश के लिए मेडल और देश की उम्मीदों पर खरा उतर पायेगी

:इस साल जुलाई और अगस्त में होने वाले टोक्यो ओलिंपिक के खेल में भारत के जिन खिलाडियों से पदक हासिल करने की उम्मीदें हैं, उनमें से एक हिमा दास भी हैं. अभी असम सरकार ने उन्हें डीएसपी बना दिया है.टोक्यो ओलिंंपिक में हिमा दास अगर क्वालिफाइ कर लेती है तो सबकीनजर उनपर रहेगी . एशियाई के खेलों में हिमा दास ने प्रदर्शन किया था. असम पुलिस में डीएसपी बनने के बाद उन्होंने कहा, की ये जिम्मेदारी हमेशा अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी.एशियाई खेलों में हिमा दास ने सिल्वर मैडल जीता था. अब वह ओलिंपिक में क्वालिफाई करने के लिए मेहनत कर रही हैं.

News Desk

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