चीन की विस्तारवादी नीति का शिकार – तिब्बत

पिछले कुछ वर्षों में, चीन ने भारत की सीमा पर कई समस्याएं खड़ी की हैं, हाल ही में हम गाल्वन…
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पिछले कुछ वर्षों में, चीन ने भारत की सीमा पर कई समस्याएं खड़ी की हैं, हाल ही में हम गाल्वन घाटी की घटना को नहीं भूले हैं। इसलिए आज तिब्बत का पूरा इतिहास, समय-समय पर तिब्बत की क्या स्थिति थी, किन देशों या राजाओं ने तिब्बत पर शासन किया और क्या चीन और तिब्बत में एक सभ्यता थी या नहीं? फिर चीन ने तिब्बत को कैसे बर्बाद कर दिया? और आज तिब्बत जैसा शांतिप्रिय देश चीन के सैन्यीकरण का मुख्य विरोधी बन गया है। अब तिब्बत रेडियोधर्मी कचरे का घर बन गया है। इसके कारण, धीरे-धीरे उन सभी नदियों का जल जिसका मूल तिब्बत है, दूषित हो गई है। ये नदियाँ अक्सा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, इरावदी और दक्षिणी एशिया के कई देशों में बहने वाली नदियाँ हैं, जिनमें भारत और बांग्लादेश जैसे घनी आबादी वाले देश भी शामिल हैं।

1951 में चीनी सेना ने एक तिब्बती प्रतिनिधिमंडल के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत तिब्बत की संप्रभुता को चीन को सौंप दिया गया था। और फिर वर्ष 1959 में, तिब्बती लोगों ने चीन के खिलाफ विद्रोह किया, लेकिन वह विद्रोह विफल हो गया, इसलिए तिब्बत के 14 वें दलाई लामा को तिब्बत छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी, दलाई लामा भारत भाग गए और तब से स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। और भारत आने के बाद, उन्होंने निर्वासन में सरकार बनाई। यानी ऐसे लोगों की सरकार जिनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है।

तिब्बत का इतिहास-

1912: चीन में किंग वंश के पतन के बाद चीनी सेना तिब्बत की राजधानी ल्हासा से बाहर कर दी गई।
13वें दलाई लामा ने स्वतंत्रता की घोषणा की और 1950 तक तिब्बतियों ने वहां शासन किया।
1935: 6 जुलाई को 14वें दलाई लामा का जन्म हुआ। नवंबर 1950 चौदहवें दलाई लामा की ताजपोशी हुई।
1950: अक्टूबर में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी तिब्बत में दाखिल हुई।
1951: मई में तिब्बत के प्रतिनिधियों ने दबाव में आकर चीन के साथ एक 17-सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें तिब्बत को स्वायत्तता देने का वादा किया गया था।
1951: सितंबर में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ल्हासा में दाखिल हो गई।
1954: दलाई लामा ने पीकिंग की यात्रा की।
1959: 10 मार्च को चीन के कब्जे के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ।
1965: चीन ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र का गठन किया।
1979: तिब्बत में मंद गति से उदारीकरण शुरू हुआ।
1985: तिब्बत को बड़े पैमाने पर पर्यटन के लिए खोल दिया गया।
1987: ल्हासा और शिगात्से में विद्रोह शुरू हुआ।
1989: हू जिंताओ और उनकी पार्टी के नेताओं के नेतृत्व में तिब्बत में दमनचक्र चला।
2002: चीन की सरकार ने दलाई लामा के साथ बातचीत प्रारंभ की। लेकिन वार्ता बेनतीजा रही।
2008: 14 मार्च को ल्हासा में चीन विरोधी दंगे के बाद तिब्बत में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।
चीन की सरकार ने इस प्रदर्शन को शक्ति से दबाया, कई लोगों की गिरफ्तारी हुई।

तिब्बत में विदेशी पत्रकारों के घुसने पर प्रतिबंध लगा दिया गया

News Desk

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