बाजार की अभूतपूर्व स्थिति और मौजूदा भाव: भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में 6 फरवरी 2026 का दिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज किया गया है। आज 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत ने ₹1,51,000 प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है। हालांकि, सुबह के कारोबार में भारी तेजी के बाद दोपहर तक कीमतों में मामूली तकनीकी सुधार (Technical Correction) देखा गया, जिससे भाव में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इस समय दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में सोने का भाव ₹1,50,850 से ₹1,51,200 के बीच झूल रहा है। निवेशकों के लिए यह स्थिति कौतूहल और चिंता दोनों का विषय बनी हुई है, क्योंकि इतनी अधिक कीमतों ने आम आदमी की क्रय शक्ति को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का गहरा असर: सोने की कीमतों में इस बेतहाशा वृद्धि का सबसे बड़ा कारण वैश्विक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक टकराव ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को चरम पर पहुंचा दिया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति बनती है, दुनिया भर के निवेशक शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी जैसे जोखिम भरे संपत्तियों से पैसा निकालकर सोने में निवेश करना पसंद करते हैं। डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की निरंतर खरीद ने भी घरेलू बाजार में कीमतों को इस रिकॉर्ड ऊंचाई तक धकेला है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व और आर्थिक नीतियां: सोने की कीमतों को दिशा देने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों की अहम भूमिका रही है। हाल ही में फेड द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने या उनमें कटौती के संकेतों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने (Spot Gold) की कीमतों को $3,000 प्रति औंस के करीब पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका में बढ़ती मुद्रास्फीति और कर्ज के संकट ने निवेशकों को डरा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप हेजिंग के लिए सोने को प्राथमिकता दी जा रही है। भारत जैसे देश में, जहां सोना केवल निवेश नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा का प्रतीक है, वैश्विक आर्थिक मंदी की आहट ने इसके महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है, जिससे कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
घरेलू मांग और आगामी शादियों का सीजन: भारत में सोने की कीमतों में तेजी का एक स्थानीय कारण शादियों का आगामी सीजन भी है। भारतीय संस्कृति में शादियों के दौरान सोने के आभूषणों की भारी मांग रहती है। भले ही कीमतें ₹1.5 लाख के पार चली गई हों, लेकिन पारंपरिक आवश्यकताओं के कारण जेवरात की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ कम नहीं हुई है। हालांकि, ऊंचे भावों के कारण उपभोक्ता अब भारी गहनों के बजाय हल्के वजन वाले आभूषणों (Lightweight Jewellery) की ओर रुख कर रहे हैं। ज्वैलर्स का मानना है कि यदि कीमतें इसी स्तर पर टिकी रहीं, तो पुराने सोने के बदले नए गहने बनवाने के चलन में और वृद्धि हो सकती है, जो बाजार में तरलता बनाए रखने में मदद करेगा।
चांदी की चमक और औद्योगिक मांग का प्रभाव: सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। चांदी अब केवल गहनों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सौर ऊर्जा पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और चिप निर्माण जैसे आधुनिक उद्योगों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। औद्योगिक मांग और निवेश की सुरक्षा के दोहरे लाभ के कारण चांदी भी रिकॉर्ड स्तर की ओर अग्रसर है। वर्तमान में चांदी के भाव ₹1,25,000 प्रति किलोग्राम के स्तर के आसपास बने हुए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि चांदी में सोने की तुलना में अधिक ‘वोलाटैलिटी’ (उतार-चढ़ाव) होती है, इसलिए निवेशकों को इस धातु में दांव लगाते समय अधिक सावधानी बरतने और लंबी अवधि का नजरिया रखने की आवश्यकता है।
भविष्य का अनुमान और निवेशकों के लिए सलाह: बाजार विशेषज्ञों और कमोडिटी एनालिस्ट्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना ₹1,65,000 के स्तर को भी छू सकता है, बशर्ते वैश्विक स्थितियां जल्द न सुधरें। निवेश के नजरिए से देखा जाए तो डिजिटल गोल्ड और ‘सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड’ (Sovereign Gold Bond) भौतिक सोने की तुलना में बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज और सुरक्षा की चिंता नहीं रहती। नए निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे एकमुश्त बड़ी राशि निवेश करने के बजाय ‘सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान’ (SIP) की तरह छोटे-छोटे हिस्सों में सोना खरीदें। फिलहाल बाजार में आई हल्की गिरावट को विशेषज्ञ एक ‘खरीद का मौका’ मान रहे हैं, क्योंकि लंबी अवधि में सोने का रिटर्न हमेशा सकारात्मक रहा है।