हमले की भयावह शुरुआत और घटनास्थल का मंजर
आज सुबह अफगानिस्तान की राजधानी काबुल का सबसे सुरक्षित माना जाने वाला ‘डिप्लोमैटिक ज़ोन’ उस समय दहल गया, जब एक हाई-सिक्योरिटी होटल के मुख्य द्वार पर ज़ोरदार धमाका हुआ। चश्मदीदों के अनुसार, धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और आसपास की इमारतों के शीशे चकनाचूर हो गए। होटल की इमारत से काले धुएं का गुबार उठते देखा गया, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाके के तुरंत बाद चारों ओर चीख-पुकार मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
हताहतों की संख्या और घायलों की स्थिति
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस आत्मघाती हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत की आशंका है, जबकि 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में होटल के कर्मचारी, विदेशी मेहमान और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। स्थानीय एम्बुलेंस सेवाओं ने घायलों को पास के इमरजेंसी अस्पतालों में भर्ती कराया है, जहाँ कई लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है क्योंकि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के दबे होने की आशंका है। अस्पताल प्रशासन ने नागरिकों से रक्तदान की अपील की है।
सुरक्षा घेरे को भेदने की साजिश
यह होटल काबुल के ‘ग्रीन ज़ोन’ के करीब स्थित है, जहाँ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहती है और बिना सघन तलाशी के किसी भी वाहन का प्रवेश वर्जित है। जांचकर्ताओं का मानना है कि हमलावरों ने सुरक्षा घेरे को भेदने के लिए किसी विशेष तकनीक या अंदरूनी मदद का सहारा लिया होगा। होटल के मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटक उड़ा दिया। इस चूक ने काबुल की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की कार्यक्षमता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
तालिबान प्रशासन की प्रतिक्रिया और बचाव कार्य
धमाके के तुरंत बाद तालिबान के सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और होटल की ओर जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया। सुरक्षा प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि विशेष कमांडो दस्ते होटल के भीतर तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई अन्य हमलावर अंदर तो नहीं छिपा है। बचाव दल मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के कार्य में जुटे हुए हैं। प्रशासन ने शहर में हाई-अलर्ट घोषित कर दिया है और संदिग्धों की धरपकड़ के लिए विभिन्न चौकियों पर तलाशी अभियान तेज़ कर दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और विदेशी मेहमानों की सुरक्षा
काबुल के इस होटल में अक्सर विदेशी राजनयिक और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ठहरते हैं, जिसके कारण इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। कई देशों के दूतावासों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है और हमले की कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने इसे निर्दोष नागरिकों पर कायरतापूर्ण हमला करार दिया है। विदेशी सरकारों ने तालिबान प्रशासन से मांग की है कि वहां रह रहे विदेशी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हमले के समय होटल में मौजूद विदेशी नागरिकों की पहचान और उनकी सुरक्षा स्थिति का पता लगाया जा रहा है।
हमले के पीछे का संभावित संगठन और उद्देश्य
फिलहाल किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का शक ‘इस्लामिक स्टेट-खुरासान’ (IS-K) की ओर है, जो पहले भी काबुल में ऐसे हाई-प्रोफाइल ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। इस हमले का मुख्य उद्देश्य संभवतः अफगानिस्तान में स्थिरता के दावों को चुनौती देना और विदेशी निवेशकों व राजनयिकों में भय का माहौल पैदा करना है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह हमला तालिबान सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमज़ोर दिखाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।