“ऑपरेशन क्लीन-अप: जम्मू की चोटियों पर छिपे दहशतगर्दों के खिलाफ बिछा ‘मौत का जाल’ “

अभियान का उद्देश्य और समय सीमा केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने जम्मू संभाग के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों और घने…
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अभियान का उद्देश्य और समय सीमा

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने जम्मू संभाग के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों और घने जंगलों में छिपे आतंकवादियों को खत्म करने के लिए ‘क्लीन-अप ऑपरेशन’ के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इस रणनीति का मुख्य लक्ष्य ‘गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले’ सभी सक्रिय आतंकियों का सफाया करना है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के कारण आतंकी इस समय अपनी गुफाओं और ठिकानों तक सीमित हैं। ऐसे में, मौसम का फायदा उठाकर उन्हें उनके सुरक्षित ठिकानों (Safe Havens) से बाहर निकलने पर मजबूर किया जाएगा ताकि मैदानी इलाकों में घुसपैठ से पहले ही उन्हें न्यूट्रलाइज किया जा सके।

सुरक्षा बलों के बीच ‘मिशन मोड’ समन्वय

इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए गृह मंत्रालय ने ‘मिशन मोड’ में काम करने का आदेश दिया है। इसके तहत भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF) और बीएसएफ (BSF) के बीच अभूतपूर्व समन्वय स्थापित किया गया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के साथ मिलकर रियल-टाइम डेटा शेयरिंग के लिए एक संयुक्त नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। रणनीति यह है कि खुफिया सूचना मिलते ही बिना समय गंवाए सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर छोटे समूहों में कमांडो ऑपरेशन किए जाएं। यह तालमेल विशेष रूप से राजौरी, पुंछ और डोडा जैसे दुर्गम पहाड़ी जिलों में केंद्रित रहेगा।

‘वाइट कॉलर टेरर’ और इको-सिस्टम पर प्रहार

रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा केवल बंदूकधारी आतंकियों को मारना नहीं, बल्कि उनके पीछे के ‘सफेदपोश’ (White Collar) नेटवर्क को ध्वस्त करना भी है। गृह सचिव ने निर्देश दिए हैं कि आतंकियों के मददगारों (Over Ground Workers – OGWs), उन्हें रसद पहुंचाने वालों और सूचना देने वाले नेटवर्क की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके लिए संदिग्ध बैंक खातों की जांच और ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) के जरिए होने वाले वित्तीय लेनदेन पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि टेरर फंडिंग की जड़ों को पूरी तरह से काटा जा सके।

आधुनिक तकनीक और ड्रोन का मुकाबला

पाकिस्तान की ओर से होने वाली ड्रोन घुसपैठ इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। ‘क्लीन-अप ऑपरेशन’ के तहत सीमावर्ती इलाकों में एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती बढ़ाई जा रही है। घने कोहरे की आड़ में सीमा पार से हथियारों और ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए थर्मल इमेजर और हाई-टेक सर्विलांस कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकियों की सटीक लोकेशन ट्रेस करने के लिए भारतीय सेना अपने निगरानी ड्रोन्स और सैटेलाइट इमेजरी की मदद ले रही है, जिससे घने जंगलों में भी आतंकियों की हलचल को पकड़ा जा सके।

ट्रांजिट रूट की घेराबंदी और नई चौकियां

सुरक्षा समीक्षा बैठक में यह तय हुआ कि जम्मू संभाग के उन इलाकों में विशेष सुरक्षा चौकियां (Security Outposts) स्थापित की जाएंगी जो आतंकियों के लिए ‘ट्रांजिट रूट’ (एक जिले से दूसरे जिले में जाने का रास्ता) के रूप में काम करते हैं। इन चौकियों के माध्यम से आतंकियों की आवाजाही को पूरी तरह ब्लॉक किया जाएगा। विशेष रूप से उन ऊंचे दर्रों और रास्तों की पहचान की गई है जिनका उपयोग आतंकी घुसपैठ के बाद सुरक्षित ठिकानों तक पहुँचने के लिए करते हैं। इन रास्तों पर 24×7 गश्त और नाकाबंदी को और अधिक सख्त कर दिया गया है।

स्थानीय भागीदारी और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का प्रभाव

सरकार की इस रणनीति में स्थानीय आबादी का विश्वास जीतना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे ऊपर है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद, स्थानीय लोगों में सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास बढ़ा है। गृह सचिव ने निर्देश दिए हैं कि ग्रामीण सुरक्षा समितियों (VDCs) को और अधिक सशक्त बनाया जाए और उन्हें आधुनिक संचार उपकरणों से लैस किया जाए। इससे न केवल सुरक्षा बलों को समय पर जानकारी मिलेगी, बल्कि आतंकी भर्ती की किसी भी संभावना को भी जड़ से खत्म किया जा सकेगा, जिससे 2026 के अंत तक जम्मू-कश्मीर को ‘आतंक मुक्त’ बनाने का लक्ष्य पूरा हो सके।

News29

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