खूब जतन से ओढ़ी कबीरा, ज्यों की त्यों धरि दीन्हीं चदरिया
जतन-खूब जतन से। कितने होश से तुम जीवन को जीते हो, कितने जतन से, उस पर ही निर्भर करेगा।
अगर दुखी हो, तो ध्यान रखना, जतन से नहीं जी रहे हो। दुख बढ़ता जाता है, तो ध्यान रखना, गलत दिशा में निकल गए हो । किसी और को दोष मत देना। क्योंकि किसी और को दोष देकर कोई कभी बदल न पाया। किसी और को दोष मत देना, क्योंकि किसी और को दोष देने का अर्थ, जीवन का रूपांतरण फिर कभी भी न हो पाएगा। अगर आख में आंसू हों तो कारण अपने हृदय में खोजना।
कौन रोता है किसी और की खातिर ऐ दोस्त ,सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया ।अगर होठों पर मुस्कुराहट हो, तो भी कारण अंदर है। आंखों में आंसू हों, तो भी कारण अंदर है।जिसने देखा कि कारण बाहर है, वही अधार्मिक है। जिसने यह बात समझ ली कि मेरी जिंदगी में जो भी हो रहा है वह मेरा ही पाप है, वह मेरे ही होश और जतन या बेहोशी और गैर-जतन का परिणाम है, वह व्यक्ति धार्मिक हो गया।
फिर दुख ज्यादा देर तुम्हारे पास न रह सकेगा। फिर तुम अचानक पाओगे एक क्रांति शुरू हुई। कल तक जो एक मुफलिस की कबा थी, एक भिखारी का वस्त्र थी, वही एक सम्राट का स्वर्णिम वस्त्र बनने लगी। कल तक जहां सिवाय कंकड़-पत्थर के कुछ भी न मिला था, वहीं हीरे-जवाहरात उपलब्ध होने लगे.