मां कर्मादेवी भगवान श्रीकृष्ण की महान भक्त थीं, इसलिए श्रीकृष्ण ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे। तब मां कर्मादेवी ने अपने सामने बैठकर भगवान श्रीकृष्ण को खिचड़ी खिलाई थी। इस दिन मां कर्मादेवी की पूजा अर्चना अनिवार्य रूप से करने तथा खिचड़ी का भोग लगाकर प्रसाद बांटने की मान्यता है।
तेली समाज द्वारा इस दिन भक्त शिरोमणि मां कर्मादेवी की जयंती धूमधाम से और बड़े उत्शाह के साथ मनाई जाती है।साहू समाज की आराध्य देवी कर्मादेवी सेवा, त्याग और भक्ति समर्पण की देवी हैं। कर्माबाई की गौरव गाथा जनमानस में श्रद्धा तथा भक्तिभाव से वर्षों से चली आ रही है।
मां कर्मादेवी का जन्म पापमोचनी एकादशी के दिन उत्तरप्रदेश के झांसी नगर में चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ था।मां कर्मादेवी बाथरी वंश की थीं। उनमें बाल्यावस्था से ही धार्मिक कहानियां सुनने की रुचि हो गई थी। कर्माबाई को जितना भी समय मिलता था, वह समय वे भगवान श्रीकृष्ण के भजन-पूजन व ध्यान आदि में लगाती थीं।अपने तन, मन और धन से सामाजिक और धार्मिक कार्यों में लगी रहने वालीं कर्मादेवी दीन-दु:खियों के प्रति दया भावना रखती थीं।
माता कर्मा बाई का जन्म नागौर जिले के कालवा गांव में 1615 ई में हुआ था। मां कर्मा बाई के पिता का नाम जीवणराम डूडी और माता रतनी देवी था। कर्मा बाई बचपन से ही चमत्कारी थी। कर्मा तैली समाज से थी।कर्मा बाई का जन्म जिस दिन हुआ तब ही वह हसी और बाद में कालवा गांव में बहुत ही तेज आंधी, तुफान और बारिश हुई।
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