आधा दिसंबर बीता, लेकिन नहीं पड़ी ,कड़ाके की ठंड, जानिए कारण

  साल का आखरी महीना दिसंबर आधा बीत चुका है। कुछ दिन बाद साल भी विदा हो जाएगा, लेकिन अभी…
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साल का आखरी महीना दिसंबर आधा बीत चुका है। कुछ दिन बाद साल भी विदा हो जाएगा, लेकिन अभी तक लोगों को उस तरह की सर्दी का अहसास नहीं हुआ है, जो इस महीने में आम हुआ करती थी।

इसको लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने भी चिंता जाहिर की है।भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मजबूत पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति के कारण दिसंबर में अब तक हिमालय के ऊपरी और निचले इलाकों में न के बराबर हिमपात हुआ है। इसका असर यह रहा है कि आधा दिसंबर बीत जाने के बाद भी मैदानी इलाकों में ठंडक का असर कम देखने को मिल रहा है।

अब तक हो जाने चाहिए थे दो हिमपात- मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक कम से कम एक से दो मध्यम हिमपात हो जाने चाहिए थे, लेकिन हिमालय की कई चोटियों पर अब तक बर्फ नहीं पड़ी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, आमतौर पर उत्तर पश्चिम भारत में नवंबर में दो से तीन मध्यम से मजबूत पश्चिमी विक्षोभ और दिसंबर में भी दो से तीन पश्चिमी विक्षोभ देखे जाते हैं। हालांकि, इस साल 10 नवंबर के बाद से कुछ भी नहीं देखा गया है, जिस कारण दिसंबर के मौसम में कोई खास बदलाव नहीं देखने को मिला है।

97 प्रतिशत बर्फबारी की कमी -आईएमडी के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में अब तक 97 प्रतिशत बारिश या बर्फबारी की कमी है। वहीं जम्मू-कश्मीर में 80 प्रतिशत कमी है। उत्तराखंड में भी बारिश या बर्फबारी नहीं हुई है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक आरके जेनामणि का कहना है कि इस बार हिमालय के ऊपरी इलाकों में भी कई इलाकों में बर्फबारी नहीं हुई है। इसका कारण है कि नवंबर के बाद से इस क्षेत्र में कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी नहीं हुआ है।

नए साल तक करना पड़ सकता है इंतजार- वैज्ञानिकों का कहना है कि कोई पूर्वानुमान न होने के कारण हमें बर्फबारी के लिए क्रिसमस या नए साल का इंतजार करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया, अभी तक पश्चिमी विक्षोभा का कोई पूर्वानुमान नहीं है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शीत लहर नहीं होगी।

 

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