जीवनशैली ,कैसे जी सकते हैं ,हम?

  जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के लिए कई शोधों में अधिकांश रूप से या फिर पूरी तरह से मानवीय गतिविधियो…
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जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के लिए कई शोधों में अधिकांश रूप से या फिर पूरी तरह से मानवीय गतिविधियो को ही जिम्मेदार माना जाता है. लेकिन क्या आज हम ऐसी जीवन शैली अपना सकते हैं जो जलवायु के बहुत अनुकूल हो और उससे जलवायु को हम इंसानों की वजह से हो रहा नुकसान ना हो वह कम हो सके. पृथ्वी को बचाने के लिए अब लोग ईको फ्रेंडली लाइफस्टाइल अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं. कुछ सरल तरीके अपनाकर भी हम क्लाइमेट फ्रेंडली जीवनशैली (Eco Friendly lifestyle) अपना सकते हैं.

हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार दुनिया के 77 प्रतिशत लोग संधारणीय जीवन के बारे में सीखने में रुचि दिखा रहे हैं. इस तरह के जीवन में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि हमारी किसी भी गतिविधि से ऐसा कुछ ना हो जिससे प्रकृति को लंबे समय में भी किसी तरह का नुकसान हे सके. जैसे अगर हमें जो भोजन कर रहे हैं, उसके तैयार होने की प्रक्रिया भी पृथ्वी को तात्कालिक और दूरगामी दोनों तरह के नुकसान ना पहुंचा सके. इसलिए कुछ सरल उपाय अपना कर हमें ईको फ्रेडली या क्लाइमेट फ्रेंडली जीवनशैली अपना सकते हैं.

ईको फ्रेडली या क्लाइमेट फ्रेंडली जीवनशैली (Climate Friendly lifestyle) अपनाने की दिशा में एक छोटा बदलाव बड़ा प्रभाव डाल सकता है अगर हमें परंपरागत विद्युत बल्ब की जगह एलईडी बल्ब (LED Bulbs) का इस्तेमाल करना शुरू कर दें. एलईडी बल्ब 75 प्रतिशत ऊर्जा कम उपयोग में लाते हैं और परंपरागत बल्बों की तुलना 25 गुना ज्यादा लंबा चलते हैं. इस कम ऊर्जा उपयोग का मतलब काम कार्बन फुटप्रिंट (carbon footprint) होता है. इनके उपयोग के लिए बहुत ज्यादा बदलाव करने की जरूरत भी नहीं होती है.

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के लिए सबसे बड़ा दोषी यातायात से हुए उत्सर्जित हुई ग्रीनहाउस गैसें हैं जो अमेरिका के कार्बन प्रदूषण का 27 प्रतिशत हिस्सा हैं. इनमें भी कार का इस प्रदूषण में सबसे ज्यादा योगदान है. इस वजह से बहुत सारी सरकारों ने कुछ सालों में सभी डीजल वाहनों को पूरी तरह से हटाने का फैसला किया है. भारत की राजधानी दिल्ली में भी डीजल कारों पर प्रतिबंध है. इस सबका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) को प्रोत्साहन देना है और जगह जगह पर चार्जिंग सुविधा मुहैया कराने का प्रयास करना है. इसके बहुत गहरे प्रभाव हो सकते हैं.

प्रदूषण का मानवीय कारणों में सबसे बड़ कारण ऊर्जा उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) का उपयोग है. इसलिए परंपरागत ऊर्जा स्रोतों की जगह अक्षय ऊर्जा जैसे कि सौर ऊर्जा (Solar Energy) या पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का उपयोग हमें ईको फ्रेडली या क्लाइमेट फ्रेंडली जीवनशैली (Climate Friendly lifestyle) बनाने में बहुत मददगार हो सकता है. भारत में भी धीरे धीरे सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है और कई जगहों पर बहुत अच्छे नतीजे देखने को मिल रहे हैं. पनबिजली और पवन ऊर्जा के स्रोत सभी जगह उपलब्ध नहीं हो सकते हैं, लेकिन सीमाओं के बाद भी इनके नतीजे अच्छे होते हैं.

घरेलू कचरा (Garbage) जिसमें रसोई और खाद्य सामग्री के खराब होने के कारण ग्रीन हाउस गैस (Greenhouse gases) निकलती हैं, वे वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का करीब 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रखती हैं. यानि अगर हमें अपने घर के कचरे और बचे हुए भोजन का बेहतर प्रबंधन करें और उससे खाद (Compost) बनाने लगे तो हम पर्यावरण की काफी कुछ मदद कर सकते हैं. निचली जमीनों को भरने के काम आने के अलावा कॉम्पोस्टिंग की प्रक्रिया मिट्टी के अपर्दन और उसके सरंक्षण में भी सहायक होती है. पानी की बचत और पौधों को खाने वाले कीड़ों को दबाकर बीमारियां फैलने से रोकने में मददगार होती है.

हम अपने भोजन शैली में बदलाव कर भी पर्यावरण (Environmnet) पर एक बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं और क्लाइमेट फ्रेंडली जीवनशैली (Climate Friendly lifestyle) का हिस्सा बन सकते हैं. जैसे भोजन में पौधों से बने पदार्थों की ज्यादा मात्रा इसमें कारगर होती है. ऐसे खाद्य पदार्थ कम जमीन का उपयोग करते हैं, उनसे ग्रीनहाउसगैस (Greenhouse Gases) भी कम निकलती है और उनमें पानी की खपत कम होती है. मांस, अंडे और दुग्ध उत्पादों को भोजन में शामिल ना करना, स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना, ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों का ही उपयोग करना, जितना जरूरत हो उतना ही खरीदा और खाना, ऐसे कुछ उपाय है जो हमारी जीवनशौली की ईको या क्लायमेट फ्रेडली बनाते हैं.

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