श्रावण सोमवार ,विशेष

  देश के 12 ज्योर्तिलिंगो में एक श्री महाकाल पृथ्वी लोक के अधिपति है। उज्जैन पूरी दुनिया से इस अर्थ…
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देश के 12 ज्योर्तिलिंगो में एक श्री महाकाल पृथ्वी लोक के अधिपति है। उज्जैन पूरी दुनिया से इस अर्थ में अलग है कि आकाश में उज्जैन को जो मध्य स्थान प्राप्त है, वहीं धरती पर भी प्राप्त है। आकाश व धरती दोनेां के केन्द्र बिन्दु पर उज्जैन स्थित है।

महाकाल का अर्थ समय और मृत्यु के देवता दोनों रूपों में लिया जाता है। इसी स्थान से पूरी पृथ्वी की काल गणना होती रही है।प्राचीन श्री महाकाल मंदिर का पुनर्निर्माण 11वी शताब्दी में हुआ। श्री महाकाल पृथ्वी के नाभी केन्द्र पर स्थित दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो दुनिया का एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है। तंत्र मन्त्र की दृष्टि से भी इस दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग का बडा महत्व है।

विश्व में अकेले श्री महाकाल है जो विविध रूपों में भक्तों को दर्शन देते है। कभी प्राकृतिक रूप में तो कभी राजसी रूप में आभूषण धारण कर। कभी भांग, कभी चंदन और सूखे मेवे से तो कभी फल, फूल से सजते है। राजाधिराज।हनुमान, शिव, देवी सरस्वती, अवंतिका, भद्रकाली, नवग्रह, शनि, राधा-कृष्ण, गणेश के मंदिरों से विभूषित यह परिसर आध्यात्मिक अनुभूति का पावन आंगन है।

श्री महाकाल मंदिर परिसर में यू तो छोटे-बडे अनेकों देवी देवताओं के मंदिर है परंतु परिसर में प्रमुख 42 मंदिर स्थापित है भगवान श्री महाकाल की प्रतिदिन पांच आरती होती है। भस्मार्ती प्रतिदिन प्रातः होती है।भस्मार्ती का समय केवल श्रावण मास में परिवर्तन किया जाता है।

इसी प्रकार महाशिवरात्रि पर्व पर भस्मार्ती दोपहर 12 बजे होती है। विश्वभर में एक मात्र श्री महाकाल है जिनकी प्रातः 4 से 6 बजे तक वैदिक मंत्रों, स्त्रोत-पाठ, वाद्य यंत्रों, शंख, डमरू, घंटी घडियालों के साथ भस्मार्ती होती है। दद्दयोदय आरती प्रातः काल 7 बजे से होती है। इस आरती में समय पर परिवर्तन होता रहता है।

तीसरी आरती प्रातः 10 बजे से नैवेद्य आरती होती है। शाम 5 बजे गर्भगृह में बाबा महाकाल का जलाभिषेक बंद रहता है और इस समय पूजन श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद शाम को संध्या आरती 7 बजे से की जाती है। शयन आरती रात्रि 10.30 बजे से होती है इसके बाद गर्भगृह के पट बंद हो जाते है। जेा अगले दिन प्रातः 4 बजे खुलते है।

आरतियों में समय-समय पर परिवर्तन होता रहता है।मंदिर परिसर के बाहर ही सिद्ध विनायक गणेश जी की विशाल प्रतिमा है ।इसी से थोड़ा आगे माँ हरसिद्धि का मंदिर है जो देवी के 52 शक्तिपीठो में से एक है ।प्रसिद्द शिप्रा का घाट रामघाट भी हरसिध्दि मंदिर के समीप ही है ।समीप ही चार धाम मंदिर है ।

एक तरह से देखा जाय तो यह देवताओ की नगरी है जहाँ भी नजर दौड़ाये मंदिर ही मंदिर नजर आएंगे।यहां के कण कण में भगवान है84 महादेव,9 नारायण, सप्तसागर , अष्टकालभैरव, चोसठ योगनी सिद्धवट, सांदीपनि आश्रम,गोपाल मंदिर,भर्तहरि गुफा, इस्कॉन मंदिर, गढ़कालिका,चिन्तामण गणेश, हनुमानजी के सेकड़ो सिद्ध मंदिर यहां की शोभा बढ़ाते है ।
सिद्ध संतों की जाग्रत समाधि

इसीलिये कहा जाता है महाकाल यहाँ सपरिवार विराजित है ।बाबा के दर्शन करने विशाल संख्या में श्रद्धालु आते ह श्रावण मास में श्रद्धालुवो की संख्या कई गुना बढ़ जाती ह।

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