विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर मिट्टी की सेहत को सुधारने के संकल्प के साथ देश के 80 शहरों में लोग अपने घरों से निकल कर मृदा बचाओ अभियान के साथ जुड़े। इस अभियान का मकसद तेजी से खराब हो रही मिट्टी की सेहत की ओर ध्यान खींचना है, जिसमें लगातार ऑर्गेनिक तत्व खत्म हो रहे हैं। वाराणसी के अस्सी घाट से लेकर आगरा, गोवा और चेन्नई समेत 80 बड़े शहरों की प्रमुख जगहों पर इस कार्यक्रम में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया।पैदल चल रहे, चेहरों पर मिट्टी का लेप लगाए और नुक्कड़ नाटक समेत कई तरह कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे स्वयंसेवकों ने कहा कि इससे अच्छा तरीका पृथ्वी दिवस मनाने का नहीं हो सकता था, हमने दशकों धरती मां को अनदेखा किया है। अब समय है उठ खड़े होने का और धरती को बचाने का।”
मिट्टी बचाओ अभियान का आह्वान ईशा फाउंडेशन के फाउंडर सद्गुरु ने पिछले महीने किया था। सद्गुरू इस समय 100 दिन की ब्रिटेन से भारत की मोटरसाइकिल यात्रा पर हैं। 30,000 किमी मोटरसाइकिल चलाकर वो नागरिकों, नेताओं, और विशेषज्ञों से मिल कर मिट्टी की सेहत बचाने का संदेश दे रहे हैं।यात्रा का मकसद सभी देशों के नेताओं और प्रभावी लोगों से मिल कर ऐसी नीतियां बनाने पर जोर देना है कि जिससे मिट्टी में आर्गेनिक तत्व 3%-6% तक बढ़ जाएं। 21 मार्च को लंदन से अपनी यात्रा शुरू करने के बाद सद्गुरू कई देशों की यात्रा कर चुके हैं।”
सद्गुरु यात्रा इस साल जून में कावेरी रिवर बेसिन में संपन्न होगी। मिट्टी की सेहत को लेकर खतरे की घंटी बज चुकी है, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अगर अभी नहीं चेते तो वर्ष 2050 तक 90% मिट्टी खराब हो जाएगी। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार अगर मिट्टी का क्षरण न रोका गया तो अन्न उत्पादन अगले 20 वर्षों में 40% कम हो जाएगा। अकेले भारत में ही 62% मिट्टी में आर्गेनिक तत्व 0.5% से भी कम हैं।