पीपल का आयुर्वेद में भी बहुत है, क्योंकि इसमें अनगिनत औषधीये गुण होते हैं , क्या पारस पीपल, पीपल वृक्ष से अलग है, परस पीपल के औषधीय गुण क्या हैं, यह कहाँ पाया जाता है एवं इसके क्या उपयोग हैं ?
पारस पीपल क्या है ?
पारस पीपल कुल का वृक्ष है, यह मध्यम आकार का सदा हरा रहने वाला एवं शीघ्र बढ़ने वाला पेड़ है , पारस पीपल सामान्यतः 40 फीट तक ऊँचा एवं इसका तना 4 फीट चोड़ा होता है, आयुर्वेद में इसे पार्श्व पीपल के नाम से भी जाना जाता है , दिखने में यह पीपल के वृक्ष जैसा ही होता है, लेकिन यह पीपल से अलग होता है,इसके पत्ते पीपल के आकर के परन्तु छोटे नोक वाले होते हैं |
पारस पीपल के फूल पांच पंखुड़ी वाले एवं पीले रंग के होते हैं , इसका फल भूरे रंग का, गोल या आयताकार व्यास वाला होता है, जिसमे स्थायी बाहरी कोष लगा होता है ,पारस पीपल के फल में 4 बीज होते हैं, जो एरंड के बीज के आकार के होते हैं एवं स्वाद में तिक्त होते हैं !
यह वृक्ष सम्पूर्ण भारत, मुख्यतः समुद्र तटवर्ती क्षेत्रो में पाया जाता है,आयुर्वेद के ग्रंथो में इसको बहुत उपयोगी गुणों वाला बताया गया है, इसका उपयोग ( पारस पीपल के छाल ) मुख्यतः चर्म रोगों में किया जाता है |
पारस पीपल के उपयोगी भाग !
इसके सभी भाग उपयोगी होते हैं , जिनका उपयोग करके भिन्न् रोगों को ठीक किया जाता है !
तने की छाल,फूल, पारस पीपल का फल, जड़
पारस पीपल की से निकलने वाला दूध
इसके अन्य भाषाओं में नाम एवं वानस्पतिक नाम:–+
पारस पीपल को अनेक नामों से जाना जाता है, अलग अलग क्षेत्रो एवं भाषाओं में इसके नाम (पारस पीपल वानस्पतिक नाम ) भी अलग – अलग हैं , पारस पीपल का वानस्पतिक नाम (Botanical Name Paras Pipal) Thespesia Populnea है एवं यह Malvaceae कुल का है , इसके अन्य भाषाओं में नाम निचे दिए गये हैं |
पारस पीपल:-
Botanical Name – Thespesia Populnea (थेस्पेसिया पोपुल्नेया)
Hindi – पारस पीपल, गजदंड, सिहोर
Sanskrit – पारिष, कतिपन, पार्श्व पीपल, गर्दभांड
English – Portia Tree (पोर्टिया ट्री )
Marathi – पारोसा पींपल, अष्ट, मनेर, कड़े पाईल
गुजराती – पारस पिपलो, बेड़ी
बंगाली – पलाश, पीपुल, गजशुंडी
पारस पीपल के औषधीय गुण (Paaras Pipal Benefits in Hindi)
आम तौर पर टोने – टोटको एवं पूजा में काम लिए जाने वाला यह वृक्ष आयुर्वेद में अपने अनूठे औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है ,पारस पीपल के पतों, फूलों, बीज एवं छाल का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं एवं अंग्रेजी दवाओं में भी किया जाता है !
चर्म रोगों का पारस पीपल की छाल से उपचार:—
इसकी छाल ग्राही एवं संकोचक होती है, जो चर्म रोगों के लिए एक रामबाण आयुर्वेदिक औषधि है, पारस पीपल की छाल से विभिन्न त्वचा रोग जैसे कंडू, ददु, दाद, खाज – खुजली एवं घाव को ठीक किया जाता है !
कंडू और ददु रोगों में इसकी छाल का क्व़ाथ बना कर पिने से लाभ होता है !
इसकी छाल का चूर्ण बना कर उसको तेल में गर्म करके लेप लगाने से दाद जैसे रोग ठीक हो जाते हैं !
चर्म रोगों में पारस पीपल के फलों की राख लगाने से राहत मिलती है !
वीर्य विकारों में पारस पीपल का उपयोग !
आयुर्वेद ग्रंथों के अनुसार पारस पीपल बलवर्धक एवं वीर्य वर्धक गुणों वाला होता है !
शुक्राणुओं की कमी को दूर करने के लिए इसके छाल से निकलने वाले दूध का प्रयोग किया जाता है !
जो पुरुष शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं उन्हें इसकी छाल का क्वाथ बना कर पीना चाहिए !
वीर्य पुष्ट करने के लिए पारस पीपल का उपयोग किया जाता है !
शुर्क्राणुओं के कीड़े मारने के लिए यह उत्तम आयुर्वेदिक औषधि है !
नपुंसकता के इलाज के लिए पारस पीपल का उपयोग किया जाता है !
पेट दर्द में पारस पीपल से लाभ:—
पारस पीपल का उपयोग पेट से सम्बंधित निम्न रोगों के लिए किया जाता है !
प्रमेह, प्रदर एवं अतिसार में इसका चूर्ण लाभदायी होता है !
पुराने खुनी दस्त में इसकी छाल का काढ़ा बना कर पीना चाहिए !
पेट में जलन होने पर भी इसका उपयोग कर सकते हैं
यह रक्त पित नाशक होता है |
दाह रोग का पारस पीपल से इलाज :—
आयुर्वेद के अनुसार जब भिन्न कारणों से पित्त कुपित हो जाते है तो, इस से शरीर के विभिन्न अंगो में जलन होती है ,| इस रोग में हाथ पैर का जलना, गले में जलन, बार बार प्यास लगना व पेट में जलन होना जैसी परेशानिया होती है , दाह रोग में पारस पीपल की छाल का क्षिरपाक देने से आराम मिलता है !
पारस पीपल के आयुर्वेदिक उपयोग :-यह एक दैवीय गुणों वाला वृक्ष है , आयुर्वेद के अनुसार इसको निम्न रोगों में उपयोग किया जाता है !
पारस पीपल वीर्य वर्धक एवं बल वृधक होता है ,
त्वचा रोगों में इसकी छाल एवं फल अत्यंत लाभदायी होते हैं !
अतिसार में इसका चूर्ण उपयोग में लिया जाता है !
इसका उपयोग हृदय रोगों में भी किया जाता है !
गले के रोगों में पारस पीपल से लाभ मिलता है !
दस्त में इसका उपयोग करने से राहत मिलती है !
नशा छुड़ाने के लिए पारस पीपल का उपयोग !
हमारे समाज में नशा एक ऐसी व्याधि है,जिसके बहुत बुरे परिणाम होते है, नशे की लत से व्यक्ति का पारिवारिक जीवन व आर्थिक स्थिति तो ख़राब होती ही है, साथ साथ उसकी सेहत पर भी इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, आयुर्वेद के अनुसार नशा मुक्ति के लिए पारस पीपल एक कारगर औषधि है,पारस पीपल का प्रयोग करके ऐसी दवा तैयार की जा रही है, जिनका उपयोग नशा मुक्ति के लिए किया जाता है |!
पारस पीपल के नुकसान :–ऐसे तो पारस पीपल आयुर्वेद में वर्णित एक उत्तम औषधि है, इसका कोई सीधा दुष्प्रभाव नही है , यह कफ को बढाने होता है, अतः इसका सेवन ऐसे समय नही करना चाहिए, जब सर्दी जुकाम जैसी कोई बीमारी से ग्रस्त हों !