विमान या कारें ,दोनों में से ,कौन ज्यादा, प्रदूषण फैलाते हैं

  दुनिया में जीवाश्म ईंधन का उपयोग सबसे ज्यादा यातायात के लिए ही होता है. इस पर निर्भरता को खत्म…
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दुनिया में जीवाश्म ईंधन का उपयोग सबसे ज्यादा यातायात के लिए ही होता है. इस पर निर्भरता को खत्म करने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहे हैं. विमानन और सड़क परिवहन में अब भी जीवाश्म ईंधन प्रमुख रूप से विद्यमान है. लंबे समय से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के लिए वायुयानों को भी एक बड़ा कारक माना जाता रहा है. समय के सात ट्रेन, बस यहां तक की कारों में भी विद्युत विकल्प देने पर काम चल रहा है. क्या अब भी वायुयान सबसे ज्यादा उत्सर्जन कर रहे हैं, इस सवाल के जवाब के लिए नए आंकड़ों की जरूरत है.

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि विमान (Aeroplanes) कार (Cars) की तुलना में ज्यादा प्रदूषण (Pollution) करते हैं. कई आंकड़े यह भी इशारा करते हैं कि कार की तुलना में विमान अधिक मात्रा में CO2 प्रति यात्री, प्रति किलोमीटर उत्सर्जन करते हैं. लेकिन दोनों की तुलना करने आसान काम नहीं हैं.

अगर कारों और विमानों के बीच ग्रीन हाउसगैस उत्सर्जन के लिहाज से तुलना की जाए तो वह सीधी और आसान नहीं होगी.  इसके लिए हमें दोनों के ईंधन खपत प्रति किलोमीटर को जानना होगा. इसके बाद इसे खास उत्सर्जन कारकों से गुणा करना होगा. जो ईंधन के प्रकार पर निर्भर करता है. इसके अलावा कई और भी कारकों को शामिल करना होगा. लेकिन उन आंकड़ों को प्रति यात्री के हिसाब में भी बदलना होगा.

समस्या ये है कि इस तरह के आंकलन में बहुत सारी चीजों को मान कर चलना पड़ा है. कितने किलोमीटर की यात्रा हुई. गाड़ी का मॉडल एक ही मानक नहीं हो सकता, यात्रियों की संख्या व्यापक नहीं हो सकती. फिर भी यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी रिपोर्ट ने कुछ प्रदूषण के में आंकड़े जारी किए थे, जो CO2 उत्सर्जन प्रति यात्री प्रति किलोमीटर की ईकाई में निकाले गए थे. ट्रेन का 14 ग्राम, छोटी कार का 42, औसत कार का 55, बस का 68, दो पहिया वाहन का 72 और विमान का 285 ग्राम है.

क्या ऐसे में यह माना जाता सकता है कि हवाई जहाज कार से ज्यादा प्रदूषक है. वैसे तो एक  बार देखने पर लगता है की हवाई जहाज ज्यादा प्रदूषण फैला रहे हैं, लेकिन ये आंकड़े पूरी तरह से सही तस्वीर दिखा नहीं रहे हैं. जहां कार के मामले में माना गया कि कार में चार लोग होते हैं, ऐसा हमेशा नहीं होता है. वहीं विमान यात्रियों की औसत संख्या 88 मानी गई है. जबकि कई देशों में औसत इससे कहीं अधिक होता है. जहां कार में चार यात्रियों का 55 ग्राम का आंकड़े एक होने पर 220 ग्राम हो जाएगा, वहीं 115 यात्रियों का ही औसत उसके आंकड़े को बहुत बदल दे

साफ है कि दूसरे अध्ययनों में आंकड़े अलग ही आएंगे. यानी ईईए के आंकड़े पूरी तरह से सही तस्वीर पेश नहीं करते. इन आंकड़ों की उपयोगिता में कारगरता अब नहीं रह सकती है क्योंकि कारों से लेकर विमानों में जबर्दस्त तकनीकी बदलाव हुए हैं विमान में नई तकनीकों ने ईंधन कारगरता बढ़ा दी है. इससे भी ईईए के आंकड़ों को वैसे का वैसा ही लेने की जरूरत नहीं है जबकि कई बार इनका उपयोग सीधे ही किया जाता रहा है.

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