आज ही, के दिन, हुई थी ,चेन्नई की, स्थापना

  आज भारत में चार बड़े महानगर हैं, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई . ये चारों शहर देश के उत्तर,…
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आज भारत में चार बड़े महानगर हैं, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई . ये चारों शहर देश के उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण हिस्से के प्रतीक हैं.चेन्नई को पहले मद्रास के नाम से जाना जाता था, चेन्नई शहर की स्थापना की कहानी रोचक है जो आज से 382 साल पहले अंग्रेजों के द्वारा एक किले के बनने से शुरू हुई थी. आज ये भारत के सबसे बड़े महानगरों में से एक है.जो धीरे धीरे बढ़कर यहां का एक प्रमुख शहर बना और बाद में चलकर पूरे दक्षिण भारत के महानगर के रूप में विकसित हो गया.

पहले विश्व युद्ध के दौरान मद्रास ही एकमात्र भारतीय शहर था जिस पर जर्मनी ने हमला किया था. आजादी के बाद मद्रास तमिलनाडु राज्य की राजधानी बन गया और देश के चार प्रमुख महानगरों में से एक बन गया. 1998 में इसका नाम चेन्नई हो गया. यह नाम पास के शहर चेन्नईपट्टनम के नाम पर रखा गया था जिसे दामरला वेंकटादरी नायक ने अपने पिता दामरला चेन्नप्पा नायकउडु के सम्मान में रखा था.

मद्रास शहर दक्षिण भारत के पूर्व में कोरोमंडल तट के पास एक किले के रूप में सबसे पहले बसा जो बाद में फोर्ट सेंट जॉर्ज के नाम ने जाना गया. इसकी जमीन पर समय विजयनगर शासन का कब्जा था जिसने वहां सरदारों को नियुक्त किया था जो नायक कहे जाते थे.

आज के चेन्नई इलाके में उस समय दामरला वेंकटादरी नायक नाम के सरदार का कब्जा था जब अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी यहां व्यापार करने आई थी. अंग्रेज उस समय एक अलग ही तट पर अपने बस्ती बसाने की कोशिश कर रहे थे. ईस्ट इंडिया कंपनी ने नायक से एक तीन मील लंबा जमीन का पट्टा हासिल किया जो मद्रासपट्टनम गांव का हिस्सा था जिसके लोग मछली पकड़ा करते थे.

22 अगस्त 1639 को ईस्ट इंडिया कंपनी के फ्रांसिस डे, अनुवाद बेरी थिम्मप्पा और अधिकारी एंड्रयू कोगन ने जागीर के करार पर दस्तखत किए जिसके बाद से चेन्नई के निर्माण कार्य शुरू हुआ. फरवरी 1640 में डे और कोगन ने इस जमीन पर नई फैक्ट्री बनाई और वहां किला बनाना शुरू किया जो उन्हें दो साल के लिए मिली थी.

1646 में मीर जुमला की अगुआई में गोलकुंडा की सेना ने मद्रास पर कब्जा कर लिया और वहां के अधिकांश क्रिश्चियन निवासों और उनके साथी भारतीय समुदायों को गुलाम बना लिया. 17वीं सदी के अंत में प्लेग, नरसंहार, नस्ली हिंसा, ने मद्रास की जनसंख्या तेसी से कम कर दी और शहर एक तरह से नष्ट ही हो गया, लेकिन नए अंग्रेजी और यूरोपीय निवासियों ने इसे फिर से खड़ा किया.

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