सैम बहादुर’ भारत में क्यों इतने हैं मशहूर

भारत में सेना के शीर्ष पदों पर काबिज सैन्य अधिकारियों में बहुत कम ऐसे हैं जिन्हें खूब शोहरत मिली है.…
1 Min Read 0 74

भारत में सेना के शीर्ष पदों पर काबिज सैन्य अधिकारियों में बहुत कम ऐसे हैं जिन्हें खूब शोहरत मिली है. इसमें सबसे प्रमुख नाम फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का आता है. सैम मानेकशॉ या सैम बहादुर के कही किस्से प्रशिद्ध है जो किसी भी भारतीय सेना को नहीं है आज यानि 27 जून को उनकी पुण्यतिथि है. और उन्हें इस दिन पर उनकी प्रेरणादायी उपलब्धियों के साथ याद किया जाता है. सैम के बारे लोगों को कई लोगो भरम भी है इसके बाउजूद आज भी उनका कद और सम्मान की मिसाल दी जाती है.

सैम मानेकशॉ का पूरा नाम सैम होरमूजजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ था. उनका जन्म 3 अप्रैल 1914 में अमृतसर में हुआ था और उनके बेहतरीन करियर के बाद जब वह रिटायर होने के 35 साल बाद उन्हें निमोनिया की बीमारी के चलते 27 जून 2008 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. ऊटी तमिलनाडु में पारसी परम्परा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया.

वर्ष 1971 के युद्ध में जब भारत ने सैन्य ताकत के दम पर पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था.  तब आर्मी चीफ सैम मानेकशॉ उस युद्ध के बड़े हीरो के तौर पर उभरे थे मानेकशॉ को दूसरे विश्व युद्ध के समय बर्मा मौर्चे पर जापानी सैनिकों के खिलाफ मशीनगन की 7 गोलियां उनकी आंतों, जिगर और गुर्दे पर लगी हैरान करने वाल्व बात थी की गोलियां आंतों और गुर्दे में लगने के बाद भी उनको मौत छू भी नहीं सकी उनकी स्थिति देख जो डॉक्टर उनके बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे वह तक हैरान थेउन्होंने सैम की शरीर से गोलियों को निकाला और उनकी आंत का एक हानि हुआ भाग तक निकाल देना पड़ा था.

मानेकशॉ का एक बयान भी बहुत लॉक प्रिय है उन्होंने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति कह रहा है कि वह मौत से नहीं डरता तो या तो वह झूठ बोल रहा है या फिर वह गोरखा है. गोरखा रेजिमेंट अपनी बहादुरी के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है आजादी के बाद मानेकशॉ भी गोरखा रेजिमेंट से जुड़े थे.

 

 

Admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *