मध्यप्रदेश सरकार ने कैबिनेट जबरन धर्मान्तरण विरोधी बिल को मंजूरी दे दी है
मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र ने बताया की शिवराज सरकार की कैबनिट में ध्वनिमत से ये बिल पास हुआ। और इसके बाद बिल विधान सभा में पेश किया जायगा।
इस विधेयक के मुताबिक, बहला-फुसलाकर , धमकी देकर ज़बरदस्ती धर्मांतरण और विवाह पर 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है. धर्मांतरण और धर्मांतरण के पश्चात होने वाले विवाह के 1 माह पूर्व डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को धर्मांतरण और विवाह करने और करवाने वाले दोनों पक्षों को लिखित में आवेदन प्रस्तुत करना होगा. बिल के मुताबिक, बगैर आवेदन प्रस्तुत किए धर्मांतरण कराने वाले धर्मगुरु, काजी , मौलवी या पादरी को 5 साल तक की सजा दी जा सकेगी. बिल के मुताबिक, धर्मांतरण और जबरन विवाह की शिकायत स्वयं पीड़ित, माता- पिता, परिजन या अभिभावक द्वारा की जा सकती है.
इस विधेयक के मुताबिक, आरोपी को स्वयं ही प्रमाणित करना होगा कि शादी बगैर किसी दबाव, धमकी, लालच या फिर बहला-फुसलाकर की है बिल में यह अपराध संज्ञेय और गैर ज़मानती होगा. इसके मुताबिक, जबरन धर्मांतरण या विवाह कराने वाली संस्थाओं का पंजीयन निरस्त किया जाएगा. धर्मांतरण या विवाह कराने वाली संस्थाओं को डोनेशन देने वाली संस्थाएं या लेने वाली संस्थाओं का रस्ट्रिेशन भी निरस्त होगा. धर्मांतरण या विवाह में सहयोग करने वाले सभी आरोपियों के विरुद्ध मुख्य आरोपी की तरह ही न्यायिक कार्यवाही की जाएगी. बिल के मुतबिक इस बिल के कानूनों के खिलाफ की गई शादी को शून्य करार दिया जाएगा.
नरोत्तम मिश्र ने ट्वीट किया ,- कोई भी व्यक्ति दूसरे को प्रलोभन ,धमकी ,बल ,दुष्प्रभाव ,विवाह के नाम पर या अन्य कोई कपटपूर्ण तरीके से सामने अथवा धर्म प्ररिवर्तन या धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं कर सकता ,कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन किये जाने का षड़यंत्र नहीं कर सकेगा