भारत में 1918 और 1921 में इन्फ्लुएंजा महामारी से लगभग 1 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। महात्मा गांधी ने उस दौरान ऑक्सीजन की कमी और देश को लोगों पर एक लेख यंग इंडिया में लिखा था।आज के संदर्भ में बापू के विचार ना केवल प्रासंगिक हैं बल्कि वर्तमान सरकार को दिशा देने वाले भी हैं।
उस संदर्भ में दो वाक्य- “जो व्यक्ति सांस लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेेंडर के ऊपर निर्भर हो वह मृतप्राय है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि भारत मृतप्राय स्थिति में है?” ऑक्सीजन की कमी गंभीर हालातो को जाहिर करती है
यह पढ़कर कोई भी सोचेगा कि किसी संवेदनशील व्यक्ति ने कोविड महामारी की दूसरी लहर में ऑक्सीजन और अस्पताल में बेड न मिलने के कारण लोगों की हुई मृत्यु और हाहाकार वाली परिस्थिति से व्यथित होकर ही लिखा होगा। लेकिन उपरोक्त दोनों वाक्य और किसी ने नहीं बल्कि हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 6 जुलाई 1921 में ‘यंग इंडिया’ में लिखे थे।
कुछ महीने के बाद 5 मार्च 1922 को नवजीवन में उन्होंने लिखा था, “भारत में पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है इसीलिए श्वासरोध अनुभव करता है”|
गांधीजी के उन सभी मन्तव्यों का परिप्रेक्ष्य था इन्फ्लुएंजा महामारी जो 1918 और 1921 में आई थी जिसकी चार लहर थी।इन्फ्लुएंजा महामारी अमेरिका में शुरू होकर वह पुरे दुनिया में फैली थी और जिसके कारण भारत के एक करोड़ से अधिक लोगों की मौत का कारण बनी। महात्मा गांधी ने 23 नवंबर 1918 में हरिलाल गांधी को एक पत्र में लिखा था-
मुझे दुःख हुआ जब पता चला कि आपका परिवार इन्फ्लुएंजा से पीड़ित था और किसी सदस्य की मृत्यु भी हो गई है। ऐसी ही खबर चारो तरफ से बार-बार आ रही है और उससे मन मुश्किल से प्रभावित हो रहा है”।
गांधी जी ने तीन साल बाद 1921 में भारत के कई सरे देशो का भ्रमण किया और देश को एक साल में आजादी प्राप्त करने हेतु गठित ‘तिलक स्वराज फण्ड’ के लिए लोगों का समर्थन मांगा और उनसे अपील
की कि फण्ड का लक्ष्य एक करोड़ रुपया जुटाना है जिसे हासिल करने में मदद करें।
गांधीजी के उस चिंतन के सौ साल बाद मोदी सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बात कही और इस विचार को आगे बढ़ाने के लिए बहुत सारे प्रयास जारी हैं, लेकिन जिस मोदी सरकार नेतृत्व ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने की बात कही वह कोरोना महामारी की दूसरी लहर में पीड़ित लोगों को ऑक्सीजन तक दिला नहीं पाई
गांधी ने सौ साल पहले जिस तरह से पराधीन भारत में गहराते बहुत सारे संकटों को लोगों को समझाने के लिए ऑक्सीजन को एक रूपक की तरह प्रयोग किया, वह बात 2021 में भारत के लिए बहुत मायने रखती थी और आज भी गांधी की उस बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।चूंकि कोरोना संक्रमण के रोगियों के परिवार ऑक्सीजन सिलेंडर तक पहुंचने के लिए दर-दर भटक रहे थे, लेकिन कुछ नेता समस्या की गंभीरता को छिपा रहे थे।
फलस्वरूप, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश पुलिस ने शशांक यादव नाम के एक युवक के खिलाफ मुकदमा चलाने का फैसला किया क्योंकि उन्होंने अपने दादा के लिए ट्वीट करके लिखा था, “ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता है”। पुलिस ने उनके ट्वीट को भ्रामक बताया यादव की अभिव्यक्ति को जिस तरीक़े से दबाया गया, वह गांधी जी द्वारा 28 दिसंबर, 1921 के अहमदाबाद के कांग्रेस अधिवेशन में दिए गए भाषण की याद दिलाता है।
उन्होंने कहा था- विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता और संस्थाएं बनाने की स्वतंत्रता, मनुष्य के दो फेफड़ों की तरह हैं । इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा – जिस तरह से दोनों फेफड़ों के बिना मनुष्य को सांस लेना असंभव है, उसी तरह स्वधीनता की ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए मनुष्य के लिए यह दोनों स्वतंत्रता अत्यावश्यक है।
नवंबर 1931 में लंदन में ‘फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी’ की बैठक में भी गांधी ने ऑक्सीजन की बात की थी। जब ब्रिटिश अधिकारियों ने सुझाव दिया कि प्रमुख जिम्मेदारियों के बिना प्रांतीय स्वायत्तता दी जाएगी तो गांधी ने कहा था कि उस तरह का सुझाव एक चिकित्सक द्वारा मरे हुए व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन देने जैसा होगा।
जब प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड-19 की अपेक्षित तीसरी लहर से पहले भारत की ऑक्सीजन उपलब्धता की समीक्षा करने के लिए कुछ सप्ताह पहले एक बैठक की, तो उन्हें गांधी द्वारा 16 सितंबर, 1928 को नव-जीवन में लिखे गए उस लेख को पढ़ने का कष्ट करना चाहिए था। गांधी जी ने एक जैन फार्म में गाय-बैल की करुणामय तरीके से सेवा करने का वर्णन किया था। गांधी ने कहा कि करुणा समुद्र की तरह विशाल होनी चाहिए।”
जिस प्रकार जीवनदायनी ऑक्सीजन हर पल समुद्र की तरह सुगंध फैलाती है, वैसे ही करुणा की ऑक्सीजन मनुष्य और अन्य सभी जीवों को सुख, शांति और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करे,” उन्होंने लिखा- भारत मे अभी जिस तरह से स्वतंत्रता के ऊपर हमला हो रहा है और हमारे देश को आंशिक मुक्त और निर्वाचित निरंकुशता बताया जा रहा है, इस परिस्थिति में देश को बचाने के लिए ऑक्सीजन के साथ-साथ “करुणा की ऑक्सीजन” की बहुत जरूरत है।