हमें देखने में आता है की जब हम बुजुर्गो के साथ बैठते है और उनके साथ बाते करते है तो अक्सर वे अपने जीवन के अनुभव, उनके जीवन से जुडी बाते वे हमारे साथ शेयर करते है। और खासतौर पर तीज त्यौहार का जिक्र अवश्य करते है। और उन्ही में से एक त्यौहार है होली। होली ऐसा त्यौहार है जो हमें जो हमें पुराने रिश्तों में आई खटाश को पुनः मिठास में बदलने का अवसर देता है।
रूठे दोस्त को मना लो 
कई बार देखा गया है की छोटी छोटी से बातो को लेकर अक्सर दोस्तों में गलत फहमिया हो जाती है। और दो पक्के दोस्त अब एक दूसरे को दुश्मन जैसे देखने लगते है। पर होली ही ऐसा पर्व है जब हम एक दूसरे की दुश्मनी हो भूलकर आपस में गले लग जाते है।
परिवार के साथ मनाये त्योहार
पहले की समय सयुक्त परिवार का चलन था। पर आज समय बदल चूका है। आज अधिकांश लोग एकल परिवार में रहते है। पर कोशिश करा चाहिए की त्योहारो को उत्सव हम एकत्र होकर सयुक्त रूप से मनाय। इससे
इस होली की त्योहार का उत्सव का मज़ा दुगना हो जायगा।
सामाजिक रीति रिवाज भूलना नहीं चाहिए
लोगो की आपस की मजाक कभी कभी दुखदाई बन जाती है। इसलिए हमें सामाजिक रीती रिवाज को बरक़रार रखकर सौहार्दपूर्ण तरीके से होली मानना चाहिए।
प्रेम के रंग
जिस से प्रेम करते हैं और अगर वह रूठा या रूठी है तो समझ लीजिए होली ही वह मौका है जब उन के मा
नने की संभाव्यता सब से ज्यादा होगी. होली पर आप छेड़खानी और चुहुलबाजी कर अपनी मासूम शरारतों से उन्हें हंसने और मानने पर मजबूर कर सकते हैं. एक फोन, एक एसएमएस, एक प्यारी सी टचिंग रिंगटोन, एक दिल को धड़काने वाला पिक्चर मैसेज या ग्रीटिंग और ढेर सारा गुलाल रूठे यार को मनाने के लिए काफी है.