ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते की पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार, नागालैंड राज्य सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के बीच हुआ यह समझौता दशकों पुराने क्षेत्रीय संघर्ष का परिणाम है। पूर्वी नागालैंड के छह जिलों के लोग लंबे समय से एक अलग राज्य ‘फ्रंटियर नागालैंड’ की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि इस क्षेत्र को विकास, बुनियादी ढांचे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में वर्षों से उपेक्षित रखा गया है। 6 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुए इस ऐतिहासिक हस्ताक्षर ने एक नया अध्याय शुरू किया है, जिसमें पूर्ण राज्य की मांग के बजाय एक स्वायत्त शासन मॉडल पर सहमति बनी है।
‘फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी’ (FNTA) का स्वरूप
FNTA एक स्वायत्त प्रशासनिक निकाय होगा, जिसे भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों के अनुरूप शक्तियां दी जाएंगी। यह नागालैंड राज्य के भीतर ही काम करेगा, लेकिन इसे निर्णय लेने की व्यापक स्वतंत्रता होगी। इस प्राधिकरण का अपना सचिवालय, विधायी ढांचा और कार्यकारी परिषद होगी। FNTA का मुख्य उद्देश्य पूर्वी नागालैंड के छह जिलों—तुएनसांग, मोन, मोन, लोंगलेंग, किफिर और नोकलाक—के प्रशासन को अधिक कुशल और स्थानीय लोगों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाना है। यह मॉडल असम के बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) की तर्ज पर आधारित है, जो स्वशासन का अधिकार देता है।
वित्तीय स्वायत्तता और विशेष बजट आवंटन
इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता वित्तीय स्वतंत्रता है। FNTA के पास अपना अलग बजट होगा, जिसे सीधे केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा। इसका मतलब है कि पूर्वी जिलों के विकास के लिए धन अब राज्य सरकार के माध्यम से रूट होने के बजाय सीधे प्राधिकरण को मिलेगा, जिससे भ्रष्टाचार और देरी की गुंजाइश कम होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे 40 से अधिक विषयों पर FNTA को खर्च करने का अधिकार दिया गया है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक पूंजी बिना किसी राजनीतिक बाधा के समय पर उपलब्ध हो सके।
प्रशासनिक और विधायी शक्तियों का हस्तांतरण
समझौते के तहत, FNTA को स्थानीय स्तर पर कानून बनाने और उन्हें लागू करने की शक्तियां प्राप्त होंगी। इसमें भूमि अधिकार, वन प्रबंधन, कृषि और सामाजिक रीति-रिवाजों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। नागालैंड सरकार की भूमिका एक पर्यवेक्षक की तरह होगी, जबकि वास्तविक जमीनी प्रशासन FNTA द्वारा निर्वाचित सदस्यों के हाथ में होगा। इसके अतिरिक्त, पूर्वी नागालैंड के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने हेतु एक विशेष ‘रोजगार सेल’ और कौशल विकास केंद्र की स्थापना का भी प्रावधान है। यह कदम स्थानीय युवाओं को उग्रवाद के रास्ते से हटाकर मुख्यधारा के विकास से जोड़ने में मदद करेगा।
सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण
पूर्वी नागालैंड की सात प्रमुख जनजातियों (कोन्याक, चांग, संगतम, खिआमनिउंगन, यिमखिउंग, फोम और तेिखिर) की अनूठी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करना इस समझौते का मूल केंद्र है। FNTA को उनकी पारंपरिक अदालतों और न्याय प्रणाली को बनाए रखने का अधिकार दिया गया है। समझौते में स्पष्ट किया गया है कि विकास की दौड़ में इन जनजातियों की सांस्कृतिक पहचान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह स्वायत्तता न केवल प्रशासनिक है, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता को भी सुरक्षा प्रदान करती है, जो दशकों से इस क्षेत्र के लोगों की सबसे बड़ी चिंता रही है।
सुरक्षा और शांति की नई दिशा
FNTA के गठन से पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद की समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद मिलेगी। ENPO के साथ हुए इस शांतिपूर्ण समाधान ने उन अलगाववादी ताकतों के आधार को कमजोर कर दिया है जो विकास की कमी का फायदा उठाते थे। गृह मंत्रालय ने इसे ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ की एक बड़ी जीत बताया है। सीमावर्ती इलाकों में शांति स्थापित होने से म्यांमार के साथ होने वाले व्यापारिक गलियारों का विकास भी तेजी से हो सकेगा। यह समझौता न केवल नागालैंड के लिए बल्कि पूरे भारत की आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाला है।