संसदीय गरिमा और समावेशी विकास का रोडमैप
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2026 के बजट सत्र के अपने ऐतिहासिक संबोधन में राष्ट्र के सम्मुख एक सशक्त और समावेशी भारत का खाका खींचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता केवल आर्थिक विकास दर बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रगति का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि आगामी दशक भारत के लिए ‘स्वर्णिम युग’ की नींव रखेगा। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में हो रहे आमूलचूल परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और मानवीय मूल्यों का संगम ही भारत को एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा, जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध होगा।
भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और पारदर्शी शासन की प्रतिबद्धता
भ्रष्टाचार को विकास का सबसे बड़ा शत्रु बताते हुए राष्ट्रपति ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी पहलों ने बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर दिया है, जिससे सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत पैसा सीधे लाभार्थी के बैंक खातों में पहुँच रहा है। प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों के बढ़ते उपयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने विश्वास दिलाया कि भ्रष्टाचार मुक्त तंत्र ही नए भारत की पहचान बनेगा। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईमानदारी से कर देने वाले नागरिकों का सम्मान करना और भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करना शासन का मूल मंत्र बना रहेगा।
सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों का सशक्तिकरण
सामाजिक न्याय के प्रति सरकार के संकल्प को दोहराते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह संसाधनों के समान वितरण का नाम है। उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए चलाई जा रही विशेष कल्याणकारी योजनाओं का विवरण दिया। राष्ट्रपति ने विशेष रूप से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास (Women-led Development) पर बल दिया और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के सफल क्रियान्वयन को सामाजिक क्रांति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के वंचित वर्ग मुख्यधारा से नहीं जुड़ेंगे, तब तक राष्ट्र का सर्वांगीण विकास अधूरा है। सरकार की नीतियां अब ‘तुष्टिकरण नहीं, बल्कि संतुष्टिकरण’ के सिद्धांत पर आधारित हैं।
युवा शक्ति और कौशल विकास के नए आयाम
देश की जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति बताया। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के सकारात्मक परिणामों और शोध व नवाचार के क्षेत्र में बढ़ते निवेश पर चर्चा की। संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से करोड़ों युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है। ‘स्टार्टअप इंडिया’ अभियान ने भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना दिया है, जिससे युवा न केवल नौकरी पाने वाले बल्कि नौकरी देने वाले भी बन रहे हैं। राष्ट्रपति ने खेल और विज्ञान के क्षेत्र में युवाओं की बढ़ती उपलब्धियों को नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।
आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक आर्थिक नेतृत्व
आर्थिक मोर्चे पर भारत की बढ़ती साख का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की सफलता को रेखांकित किया। उन्होंने रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता की प्रशंसा की। संबोधन में बताया गया कि भारत अब रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं बल्कि एक प्रमुख निर्यातक बनकर उभर रहा है। यूरोपीय संघ के साथ हालिया व्यापारिक समझौतों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था एक चमकदार बिंदु बनी हुई है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ‘गति शक्ति’ योजना ने लॉजिस्टिक्स लागत को कम किया है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी हो गए हैं और मेक इन इंडिया को नई गति मिली है।
पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन इकोनॉमी का लक्ष्य
अंत में राष्ट्रपति ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की वैश्विक जिम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने ‘मिशन लाइफ’ (LiFE) और इंटरनेशनल सोलर अलायंस के माध्यम से भारत द्वारा किए जा रहे नेतृत्व की चर्चा की। राष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनने की राह ‘ग्रीन ग्रोथ’ से होकर गुजरती है। सरकार हाइड्रोजन मिशन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा रही है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे विकास के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। यह संबोधन न केवल उपलब्धियों का लेखा-जोखा था, बल्कि एक समृद्ध, सुरक्षित और सामरिक रूप से सक्षम भारत के निर्माण का आह्वान भी था।