समझौते का स्वरूप और मुख्य वित्तीय विवरण
अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) की सहायक कंपनी ‘ADNOC गैस’ ने HPCL के साथ तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक बिक्री और खरीद समझौते (SPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते की कुल अनुमानित वैल्यू 2.5 अरब डॉलर से 3 अरब डॉलर के बीच है। यह समझौता अगले 10 वर्षों के लिए प्रभावी होगा, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते व्यापारिक और ऊर्जा संबंधों को दर्शाता है। इस सौदे के तहत, यूएई प्रतिवर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन (mmtpa) एलएनजी की आपूर्ति भारत को करेगा, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को एक नया आयाम मिलेगा।
ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति का प्रमुख स्रोत
इस समझौते के तहत एलएनजी की आपूर्ति मुख्य रूप से एडीएनओसी गैस की ‘दास आइलैंड’ (Das Island) स्थित तरलीकृत सुविधा से की जाएगी। दास आइलैंड दुनिया के सबसे पुराने और भरोसेमंद एलएनजी संयंत्रों में से एक है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 6 मिलियन टन है। भारत को होने वाली यह आपूर्ति 2028-2029 से शुरू होने की उम्मीद है। यह समझौता उस पुराने ‘हेड्स ऑफ एग्रीमेंट’ (HoA) का आधिकारिक रूप है, जिस पर पहले चर्चा हुई थी। अब इसे एक बाध्यकारी अनुबंध में बदल दिया गया है, जिससे भारत को अगले एक दशक तक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
भारत के ऊर्जा लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता
यह समझौता भारत सरकार के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसके तहत 2030 तक देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर 15% करना है। वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले और तेल पर अधिक निर्भर है, लेकिन पर्यावरण लक्ष्यों और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना अनिवार्य है। एडीएनओसी गैस के सीईओ फातिमा अल नूमी ने कहा कि यह सौदा भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने और स्वच्छ ईंधन की ओर संक्रमण में मदद करेगा।
एचपीसीएल की परिचालन क्षमता में वृद्धि
एचपीसीएल इस एलएनजी का उपयोग मुख्य रूप से अपनी रिफाइनरियों, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क और उर्वरक एवं पेट्रोकेमिकल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी। कंपनी के अनुसार, यह समझौता उसे एक विश्वसनीय प्राकृतिक गैस आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करेगा। विशेष रूप से गुजरात के छारा (Chhara) में स्थित एचपीसीएल के नए एलएनजी टर्मिनल के लिए यह समझौता काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे टर्मिनल की परिचालन क्षमता और उपयोग दर में सुधार होगा। यह आपूर्ति देश के औद्योगिक विकास और घरेलू गैस ग्रिड को मजबूती प्रदान करेगी।
भारत और यूएई के बीच गहराता रणनीतिक संबंध
इस समझौते पर हस्ताक्षर यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के दौरान हुए। उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई मुलाकात में ऊर्जा, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में कुल 12 समझौतों पर सहमति बनी। इस ताज़ा सौदे के बाद भारत, यूएई का सबसे बड़ा एलएनजी ग्राहक बन गया है। पिछले 24 महीनों में एडीएनओसी ने भारतीय कंपनियों के साथ कुल 20 अरब डॉलर से अधिक के समझौते किए हैं। यह साझेदारी न केवल व्यापारिक है, बल्कि दोनों देशों के बीच ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।
भविष्य की संभावनाएं और वैश्विक बाजार पर प्रभाव
2029 तक एडीएनओसी गैस की कुल एलएनजी उत्पादन क्षमता बढ़कर 15.6 mmtpa होने की उम्मीद है, जिसका लगभग 20% हिस्सा (3.2 mmtpa) अकेले भारतीय कंपनियों के पास आरक्षित होगा। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, इस तरह के 10-वर्षीय दीर्घकालिक अनुबंध भारत के लिए किफायती दरों पर ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। यह सौदा न केवल एशिया के गैस बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करता है, बल्कि कम कार्बन उत्सर्जन वाले ईंधन की दिशा में वैश्विक प्रयासों को भी गति देता है।