जयपुर में ऐतिहासिक परेड का आयोजन
इस वर्ष का मुख्य आकर्षण जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजित भव्य परेड रही। यह भारतीय सेना के इतिहास में पहली बार हुआ जब सेना दिवस की मुख्य परेड किसी सैन्य छावनी (Cantonment) से बाहर एक सार्वजनिक सड़क पर आयोजित की गई। लगभग 3 किलोमीटर लंबे मार्ग पर सैनिकों के कदमताल और युद्धक विमानों की गर्जना ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस स्थान का चुनाव इसलिए किया गया ताकि अधिक से अधिक नागरिक अपनी सेना की ताकत को करीब से देख सकें और उनके बीच एक गहरा जुड़ाव पैदा हो।
अत्याधुनिक हथियारों का शक्ति प्रदर्शन
परेड के दौरान ‘नया भारत’ अपनी सैन्य आत्मनिर्भरता और आधुनिकता का प्रदर्शन करता दिखा। रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले T-90 भीष्म और स्वदेशी अर्जुन टैंक ने अपनी धमक से जमीन हिला दी। इसके साथ ही ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और ‘आकाश’ एयर डिफेंस सिस्टम का भी प्रदर्शन किया गया। हवा में अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों ने युद्धक करतब दिखाए, जबकि बीकानेर के नाल एयरबेस से उड़े जगुआर लड़ाकू विमानों ने परेड स्थल के ऊपर से फ्लाईपास्ट कर आसमान को तिरंगे के रंगों से भर दिया।
‘भैरव बटालियन’ और भविष्य की तकनीक
2026 की परेड की एक बड़ी विशेषता नई गठित ‘भैरव बटालियन’ की पहली सार्वजनिक झलक रही। यह बटालियन अत्याधुनिक युद्ध प्रणालियों और भविष्य की चुनौतियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है। इसके अलावा, सेना ने ‘रोबोटिक डॉग’ और डिजिटल युद्ध प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया। इस वर्ष की थीम “नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष” रखी गई है, जो यह दर्शाता है कि भारतीय सेना अब केवल हथियारों से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा-आधारित तकनीक से भी लैस हो रही है।
वीरों का सम्मान और अलंकरण समारोह
परेड शुरू होने से पहले एक गरिमामयी अलंकरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सैन्य अधिकारियों और जवानों को उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अन्य अभियानों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों की वीरांगनाओं को वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए। अशोक चक्र, परमवीर चक्र और महावीर चक्र विजेताओं ने परेड की टुकड़ियों का नेतृत्व किया। यह क्षण अत्यंत भावुक और गर्व से भरा था, जब पूरा जयपुर अपने रक्षकों के सम्मान में तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में सेना की ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को हर भारतीय के लिए प्रेरणा बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सेना के अदम्य साहस और अनुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ आपदाओं के समय भी देश की ढाल बनी रहती है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि देश को अपने सैनिकों के त्याग पर गर्व है और सरकार उनकी आधुनिक सुख-सुविधाओं और हथियारों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सेना दिवस का ऐतिहासिक महत्व
प्रतिवर्ष 15 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिन 1949 की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जब फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी। यह क्षण भारतीय सेना के पूर्ण रूप से भारतीयकरण का प्रतीक था। तब से यह दिन केवल एक सैन्य उत्सव नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता और एकता का संकल्प दिवस बन गया है। जयपुर में इस बार का आयोजन नागरिक-सैन्य संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है।