“महाकुंभ 2026: मकर संक्रांति के पहले बड़े स्नान पर प्रयागराज में ‘भक्ति का महासंगम’, लाखों ने किया अमृत स्नान”

संगम तट पर आस्था का महासंगम मकर संक्रांति के पावन पर्व पर प्रयागराज का संगम तट ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय…
1 Min Read 0 31

संगम तट पर आस्था का महासंगम

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर प्रयागराज का संगम तट ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय माँ गंगे’ के उद्घोष से गूंज उठा। आज सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही महाकुंभ का प्रथम मुख्य स्नान पर्व आरंभ हुआ। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद, श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। भोर की पहली किरण के साथ ही नर-नारी, साधु-संत और अबाल-वृद्ध ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में डुबकी लगाई। मान्यता है कि आज के दिन संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

साधु-संतों और अखाड़ों का वैभव

महाकुंभ की असली रौनक विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों के आगमन से बनी रही। नागा साधुओं के शाही अंदाज और उनके भस्म लेपन ने विदेशी पर्यटकों और आम श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न अखाड़ों द्वारा निकाली गई भव्य पेशवाई में हाथी, घोड़े और बैंड-बाजों के साथ साधु-संतों ने संगम की ओर प्रस्थान किया। अखाड़ों के शिविरों में भजन-कीर्तन और धुनी रमाए संतों के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। संतों के सानिध्य में अध्यात्म की एक अनूठी धारा बहती दिखी, जो भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की अटूट परंपरा को जीवंत कर रही थी।

कल्पवासियों की कठिन तपस्या

संगम की रेती पर बसे ‘तंबू के शहर’ में लाखों कल्पवासियों ने अपना एक महीने का कठिन व्रत शुरू किया है। कल्पवासी भीषण ठंड में भी ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करते हैं और दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। उनका अधिकांश समय जप, तप और धार्मिक चर्चाओं में व्यतीत होता है। कल्पवास को मन और इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने का मार्ग माना जाता है। इस वर्ष महाकुंभ होने के कारण कल्पवासियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे पूरा मेला क्षेत्र एक विशाल आध्यात्मिक शिविर में तब्दील हो गया है।

प्रशासन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

उत्तर प्रदेश सरकार और मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। पूरे मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटा गया है और हजारों की संख्या में पुलिस बल, एटीएस और जल पुलिस तैनात की गई है। भीड़ नियंत्रण के लिए ड्रोन कैमरों और एआई (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। स्नान घाटों पर बैरिकेडिंग और चेंजिंग रूम की व्यापक व्यवस्था की गई है ताकि महिलाओं को कोई असुविधा न हो। इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति के लिए अस्थाई अस्पतालों और एम्बुलेंस सेवाओं को चौबीसों घंटे अलर्ट पर रखा गया है।

डिजिटल कुंभ और आधुनिक सुविधाएँ

2026 के इस महाकुंभ को ‘डिजिटल कुंभ’ के रूप में प्रमोट किया गया है। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए मोबाइल ऐप लॉन्च किए गए हैं, जो घाटों की दूरी, पार्किंग की उपलब्धता और खोया-पाया केंद्र की जानकारी प्रदान कर रहे हैं। मेला क्षेत्र में हाई-स्पीड वाई-फाई जोन और स्मार्ट सूचना केंद्र बनाए गए हैं। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ‘स्वच्छ कुंभ’ अभियान के तहत हजारों पोर्टेबल टॉयलेट और डस्टबिन लगाए गए हैं। इलेक्ट्रिक बसों और ई-रिक्शा के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक घाट से दूसरे घाट तक पहुँचाने की सुगम व्यवस्था की गई है, जिससे यातायात प्रबंधन में काफी मदद मिल रही है।

आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व

प्रयागराज महाकुंभ न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आजीविका और सांस्कृतिक विनिमय का केंद्र भी है। इस मेले से स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प और पर्यटन उद्योग को भारी बढ़ावा मिला है। देश-विदेश से आए कलाकार सांस्कृतिक पंडालों में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे भारत की ‘विविधता में एकता’ का संदेश पूरी दुनिया में जा रहा है। शाम के समय संगम तट पर होने वाली ‘महाआरती’ का दृश्य किसी दिव्य लोक जैसा प्रतीत होता है, जो विदेशी मेहमानों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। यह आयोजन वैश्विक स्तर पर शांति और सद्भाव का प्रतीक बन गया है।

News29

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *