ब्रह्मपुरेश्वर मंदिर- यह मंदिर तमिलनाडु के त्रिची के पास थिरुपत्तूर में स्थित है,ब्रह्मा जी को ब्रह्मांड के रचयिता होने का अत्यधिक गर्व हो गया और वह भगवान शिव को भी छोटा दिखाने लगे,इससे क्रोधित शिवजी ने ब्रह्मा के पांचवें सिर को काट दिया, और उन्हें श्राप दिया कि वह अपनी सृजन शक्ति खो देंगे, इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए ब्रह्माजी इस मंदिर में आये और उन्होंने ब्रह्मपुरीश्वर के चारों ओर 12 शिव लिंग स्थापित किये और घोर तप किया ब्रह्मा की प्रार्थना से शिवजी ने उन्हें दर्शन दिए उनके श्राप से मुक्ति कर पुनः सृष्टि की शक्ति और जिम्मेदारी भी वापस लौटा दी,शिव ने चूँकि ब्रह्मा ने स्वयं अपना भाग्य यहीं पर फिर से लिखा इसलिए उन्हें इस मंदिर में आने वाले अपने भक्तों का भाग्य फिर से लिखना होगा इसलिए इस मंदिर में प्रार्थना करने से जीवन में एक बार अपने भाग्य बदला जा सकता हैं यहाँ के दर्शन मात्र से जीवन में एक नया मोड़ आता है।