8 मार्च को आप भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आपने अपने दोस्त ,अपनी माँ ,बहन और अपनी वाइफबधाई भी दे दी होगी.लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है और ये मनाना कब शुरू हुआ?
ये आइडिया एक महिला का ही था. क्लारा ज़ेटकिन ने 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं की एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया. उस वक़्त कॉन्फ़्रेंस में 17 देशों की 100 महिलाएं मौजूद थीं. उन सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया.
सबसे पहले साल 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था.ये सवाल तो आपके मन आता ही होगा कि आख़िर 8 मार्च को ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है? दरअसल, क्लारा ज़ेटकिन ने महिला दिवस मनाने के लिए कोई तारीख़ पक्की नहीं की थी.
1917 में युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने ‘ब्रेड एंड पीस’ (यानी खाना और शांति) की मांग की. महिलाओं की हड़ताल ने वहां के सम्राट निकोलस को पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया और अंतरिम सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया.उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था. जिस दिन महिलाओं ने यह हड़ताल शुरू की थी वो तारीख़ 23 फ़रवरी थी. ग्रेगेरियन कैलेंडर में यह दिन 8 मार्च था और उसी के बाद से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाने लगा.
दुनियाभर में कैसे मनाया जाता है -कई देशों में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की जाती है. रूस और दूसरे कई देशों में इस दिन के आस-पास फूलों की कीमत काफी बढ़ जाती है. इस दौरान महिला और पुरुष एक-दूसरे को फूल देते हैं.
चीन में ज़्यादातर दफ़्तरों में महिलाओं को आधे दिन की छुट्टी दी जाती है. वहीं अमरीका में मार्च का महीना ‘विमेन्स हिस्ट्री मंथ’ के तौर पर मनाया जाता है.
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मानाने का उद्देश्य-समाज में महिलाओं को बराबरी को हक दिलाना है। साथ ही इसका उद्देश्य हर एक महिला को उनका हक दिलाना भी है। साथ ही किसी भी क्षेत्र में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के मकसद से भी इस दिवस को मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के अधिकारों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने और उन्हें जागरुक करने के मकसद से कई कार्यक्रम और कैंपेन भी आयोजित किए जाते हैं।