बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना यानि काका का जन्म 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में हुआ। राजेश खन्ना का इंडस्ट्री में अलग कद रहा है। उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्मों में काम किया है। दिलचस्प बात यह है कि बॉलीवुड में 17 ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले वह पहले सुपरस्टार थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक राजेश खन्ना ने 1969 से 1971 के बीच लगातार 17 ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, जिसके बाद वे हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहलाए।
आइए जानते हैं उनके बारे में…
राजेश खन्ना ने अपने दौर में ऐसा स्टारडम देखा है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। चेतन आनंद की फिल्म ‘आखिरी खत’ (1966) से डेब्यू करने वाले राजेश खन्ना को एक वक्त बॉक्स ऑफिस का सबसे भरोसेमंद कलाकार माना जाता था। ‘आखिरी खत’ 40वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म थी, जो भारत में बनाई गयी थी। इसके बाद ‘राज’ (1967), ‘औरत’ (1967) , ‘बहारों के सपने’ (1967), ‘इत्तेफाक’ (1969) और ‘डोली’ (1970) में काका ने अभिनय किया।
अगर राजेश खन्ना के स्टारडम की बात करें तो शक्ति सामंत की आराधना (1969) से उनके स्टारडम की शुरुआत हुई। उन्होंने लगातार 17 ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। ‘आराधना’ को फिल्मफेयर बेस्ट फिल्म का पुरस्कार मिला। राज खोसला की ‘दो रास्ते’ (1969) ने भी उनका ध्यान खींचा। इसके बाद राजेश खन्ना ने मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक हिट फिल्में दीं।
मनमोहन देसाई की ‘सच्चा झूठा’ (1970) में राजेश खन्ना ने एक ग्रामीण भोला की भूमिका निभाई थी। इसमें जहां मुमताज ने उनकी प्रेमिका की भूमिका निभाई, वहीं अभिनेत्री नाज ने मेरी प्यारी बहनिया बनेगा दुल्हनिया के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की, जिसे राजेश ने फिल्म में उनके लिए गाया था। आज भी राजेश खन्ना को मुकुल दत्त की ‘आन मिलो सजना’ (1970) में आशा पारेख के साथ अच्छा तो हम चलते हैं के लिए याद किया जाता है। इसके अलावा ‘आनंद’, ‘अंदाज’, ‘हाथी मेरे साथी’, ‘बावर्ची’, ‘जोरू का गुलाम’, समेत काका की तमाम फिल्में आज भी खूब पसंद की जाती हैं। 18 जुलाई 2012 को लंबी बीमारी के बाद राजेश खन्ना का निधन हो गया। हालांकि, अपनी शानदार फिल्मों के जरिए वे आज भी जिंदा हैं।