इंटरनेशनल डे ऑफ फैमिलीज़-ज़रूरी है ,परिवार का साथ, और फैमिली बॉन्डिंग

  इंटरनेट और मोबाइल के इस जमाने में कई बार हम खुद में इतने लीन हो जाते हैं कि परिवार…
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इंटरनेट और मोबाइल के इस जमाने में कई बार हम खुद में इतने लीन हो जाते हैं कि परिवार और समाज से कटते चले जाते हैं और अपने लिए उनके साथ का महत्‍व खो देते हैं. जीवन की रफ्तार हमें अपने भाई-बहन, माता-पिता, पति-पत्‍नी जैसे हर रिलेशन को पीछे छोड़ने को मजबूत कर देती है और इस दौड़भाग में आगे रहने के चक्‍कर में फैमिली बॉन्डिंग कहीं गायब हो जाती है. इसका एहसास हमें तब होता है, जब हम अपने बुरे दौर से गुजरते हैं.

शोधों में पाया गया है कि परिवार के बीच आपसी गहराई और बॉन्डिंग के अभाव में लोग हर कदम पर खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं और मानसिक तौर पर बीमार हो जाते हैं. ऐसे में ‘इंटरनेशनल डे ऑफ फैमिलीज़’ पर हम आपको बताते हैं कि परिवार का हर किसी के जीवन में क्‍या महत्‍व है और बच्‍चों के परवरिश में फैमिली बॉडिंग क्‍यों जरूरी है.

इन वजहों से परिवार होता है ज़रूरी-
मेंटल हेल्‍थ सुधारे- अगर आप अवसाद, अकेलेपन, तनाव जैसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं, तो परिवार के साथ संवाद आपको आराम पहुचाता है.खासतौर पर अगर आप मोबाइल आदि की बजाय आमने सामने या करीब होते हैं.

बच्‍चों के प्रदर्शन में सुधार- जब बच्‍चे अपने पूरे परिवार के साथ रहते हैं और साथ में सुख-दुख शेयर करते हैं, तो उनका संचार कौशल और शिक्षा में प्रदर्शन बेहतर होता है. वे पढ़ाई के अलावा हर तरह की गतिविधियों में बेहतर होते हैं.”

बेहतर बर्ताव की शिक्षा- शोधों में ये पाया गया है कि जब बच्‍चा परिवार के साथ रहता है, तो बिहेवियर प्रॉब्‍लम का चांस कम होता है. वे परिवार में अच्‍छा बर्ताव सीखते हैं और उसके महत्‍व को भी समझते हैं, जिससे वायलेंस, गलत भाषा आदि का वे इस्‍तेमाल नहीं करते और वे इनसे दूर रहना पसंद करते हैं.

बढ़ता है आत्‍मविश्‍वास- परिवार के हर सदस्‍य के लिए परिवार का साथ उनका आत्‍मविश्‍वास बढ़ाने वाला होता है. बच्‍चे जहां खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं, वैसे ही घर के बड़े भी भविष्‍य को लेकर टेंशन फ्री रहते हैं.”

बचपन से सीखते हैं पेरेंटिंग- जिन लोगों का बचपन बहुत ही अच्‍छा गुजरा है और वे अपने माता-पिता या परिवार के अन्‍य सदस्‍यों के साथ एक खुशहाल जीवन जिए हैं, वे आगे चलकर बेहतर पेरेंट्स बनते हैं.

सीखते हैं आपसी मतभेद को सुलझाना- घर पर रहना हर वक्‍त मजेदार नहीं होता. कई बार परिवार के सभी सदस्‍यों का विचार अलग-अलग होता है और आपसी मतभेद भी हो सकते हैं. ऐसे में बचपन से ही वे नरमी और तमीज़ से आपसी मतभेद को सुलझाना और सही तरीके से अपनी बात रखना सीखते हैं.”

सेहत रहता है बेहतर- जब आप बेहतर जीवन जीते हैं और कम तनाव झेलते हैं, तो इससे आपका हार्ट और ब्‍लड प्रेशर भी बेहतर तरीके से काम करता है और आप लंबी उम्र तक सेहतमंद बने रहते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)”

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