मेक्सिको दूर पहाड़ों में बसा हुआ गांव है । छोटी आबादी है, सात सौ आदमी हैं। सब अंधे हैं। बड़ा विशिष्ट गांव है। सब बच्चे आंख वाले पैदा होते हैं, लेकिन तीन-चार महीने के भीतर अंधे हो जाते हैं। एक खास तरह की मधुमक्खी बड़ी मात्रा में पायी जाती है, उसके काटने के जहर से अंधे हो जाते हैं। उससे बचने का भी कोई उपाय नहीं, क्योंकि बाकी भी सब अंधे हैं। आज से सौ साल पहले आदमी आंखों वाला उस कबीले में प्रवेश किया। एक वैज्ञानिक अध्ययन करने पहुंच गया। वह बड़ा हैरान हुआ। सात सौ लोगों की बस्ती, अब अंधे! वहां भी कभी आंख वाला सदियों से हुआ ही नहीं है। काम चलता है, घसिटता हुआ किसी तरह। थोड़ी-बहुत सब्जी भी उगा लेते हैं, थोड़ी बहुत खेती भी कर लेते हैं। बड़ा मुश्किल मामला है। किसी तरह जुटा लेते हैं, एक जून पेट भर लेते हैं। वह आदमी, वह वैज्ञानिक उस कबीले की एक लड़की के प्रेम में पड़ गया। वह अध्ययन करने गया था। अध्ययन कर रहा था। वह उसे प्रेम में पड़ गया। लेकिन गांव वालों ने कहा: एक शर्त है, विवाह हम करवा देंगे, लेकिन आंखें फोड़नी होंगी। क्योंकि यह हम मान ही नहीं सकते कि आंख वाला आदमी स्वस्थ है। सात सौ जहां अंधे हों और सदा से जहां अंधे ही आदमी रहे हों, वहां आंख वाले को अस्वस्थ तो मानेंगे ही! कुछ गड़बड़ है।
तुम्हीं सोचो, अगर अचानक एक आदमी पैदा हो जाए जिसकी तीन आंखें हों तो बस तुम ले जाओगे अस्पताल, डाक्टर से कहोगे कि इसका आपरेशन करो। अगर बुद्धिमान हुए तो आपरेशन करवाने में लगोगे। अगर बुद्धू हुए तो पूजा करने लगोगे कि शायद शंकर जी का अवतार हुआ है या क्या मामला है! मगर स्वीकार कोई भी नहीं करेगा कि यह सामान्य है। कुछ विकृति है। कुछ गड़बड़ है।
उस कबीले के लोगों ने कहा कि हम राजी हैं, विवाह तुम्हारा कर देंगे, मगर आंखें गंवानी पड़ेंगी। वह वैज्ञानिक वहां से भाग खड़ा हुआ। भागना ही पड़ा। उसने कहा: यह तो खतरनाक मामला है। आंखें अपनी गंवाना पड़े और इन पागलों को कौन समझाए कि अंधा होना कोई स्वास्थ्य की बात नहीं है। मगर जहां भीड़ अंधों की हो, वहां कठिनाई हो जाती है।
जिब्रान की बड़ी प्रसिद्ध कहानी है। एक गांव में एक जादूगर आया और उसने एक मंत्र फूंका और एक कुएं में कुछ चीज फेंक दी और कहा कि जो भी इसका पानी पीएगा पागल हो जाएगा। उस गांव में दो ही कुएं थे–एक गांव का कुआं, एक राजा का कुआं। गांव के कुएं का सबको पानी पीना हो पड़ा, और कुआं ही न था। वे सब सांझ होते-होते पागल हो गए। सिर्फ राजा, उसका वजीर, उसकी रानी, ये तीन बच गए। वे बड़े प्रसन्न थे, भगवान को धन्यवाद दे रहे थे कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे कुएं में कुछ खतरा नहीं हुआ, लेकिन शाम को उन्हें पता चला कि गलती में हैं वे। जब सारा गांव पागल हो गया तो गांव में एक अफवाह जोर से उड़ी कि राजा का दिमाग खराब हो गया। स्वभाविक। गांव भर के लोग इकट्ठे होने लगे महल के पास, कि राजा का दिमाग खराब हो गया। और उसमें कुछ राजनेता भी होंगे, वे चिल्लाने लगे कि राजा को बदलेंगे, क्योंकि पागल राजा हम बरदाश्त नहीं कर सकते। राजा के सिपाही भी पागल हो गए थे। राजा के पहरेदार भी पागल हो गए थे। वे भी भीड़ में सम्मिलित थे। अब बड़ी मुश्किल थी। राजा उन्हीं के बल पर तो राजा था। जब पागलों की भीड़ सब तरफ इकट्ठी हो गई–और राजा जानता है कि ये पागल हैं, मगर अब क्या उपाय है?–उसने अपने बूढ़े वजीर से कहां कंपते हुए कि अब मैं क्या करूं? हमें पक्का पता है कि हम ठीक हैं, ये गलत हैं; मगर यह भीड़ है। सारा गांव पागल हो गया है। मेरे लिए कोई उपाय है?
वजीर ने कहा; आप एक काम करो, मैं इनको। उलझा कर रखता हूं थोड़ी देर, आप भागो, उस कुएं का पानी पीकर आ जाओ। अब और कोई उपाय नहीं।
राजा भागा, उस कुएं का पानी पीकर जब आया तो नग-धड़ंग नाचता हुआ चला आ रहा था। उस गांव में बहुत जलसा मनाया गया उस रात कि अपने राजा का दिमाग ठीक हो गया है। अपना प्यारा राजा! इसका दिमाग बिलकुल ठीक हो गया! नंगे राजा को लेकर वे खूब उछले-कूदे, खूब जिंदाबाद किया।
भीड़ जो करती है वह ठीक मालूम होता है। भीड़ से जो अन्यथा करोगे, भीड़ पागल समझेगी।