महिलाओं को बराबरी का दर्जा और घर में मालिकाना हक देने के लिए महाराष्ट्र की बाकापुर पंचायत ने अनोखी मिसाल पेश की। वर्ष 2008 में ग्राम पंचायत में विशेष प्रावधान के जरिए इस अनोखी पहल की शुरूआत की गई। 2000 घरों वाले इस गाँव में सभी दरवाजों पर महिलाओं का नाम मालिक या सह मालिक के नाम पर दर्ज है। औरंगाबाद से 20 किमी दूर स्थित बाकापुर गाँव में घरों के बाहर दर्ज महिलाओं के नाम उन्हें बराबरी का हक देने की कहानी कहते हैं।
इस बारे में बाकापुर की सरपंच कविता साल्वे ने बताया, इस निर्णय के बाद हमारे गाँव की महिलाओं की घरों के मामले में सुनी जाने लगी। वो बेधड़क अपनी राय रख सकती हैं। अपने शासनकाल में महिलाओं ये अनोखा अधिकार दिलाने वाली पूर्व सरपंच सुदमराव पालास्कर बताती हैं, पहले एक डर सा रहता था कि परिवार से बिना पूछे पुरुष घरों को बेच सकते थे। इस तरह के कुछ पुराने मामलों को देखते हुए ये निर्णय लिया गया। ऐसा करने न केवल महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा मिली, बल्कि महिलाओं को घर के मामलों में निर्णय लेने के अधिकार भी मिले।
जब ये प्रस्ताव लाया गया तो उस समय ग्राम पंचायत में सात सदस्य थे, किसी ने इसका विरोध नहीं किया। आज बाकापुर के हर घर की नाम पटि्टा पर महिलाओं का नाम उनके मालिकाना हक को दिखाता है।
यही नहीं, अगर कोई बाकापुर में घर खरीदना भी चाहता है तो भी उसे पत्नी को सह मालिक के तौर पर रखना होगा।