दुनिया की, सबसे छोटी लेखिका ने, 5 साल की उम्र में ,लिख दी किताब

  अपना हुनर दिखाने के लिए कोई उम्र नहीं होती है। एक छोटा बच्चा भी अपने हुनर से दुनिया को…
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अपना हुनर दिखाने के लिए कोई उम्र नहीं होती है। एक छोटा बच्चा भी अपने हुनर से दुनिया को हैरान कर सकता है। दुनिया में ऐसे कई उदाहरण देखने और सुनने को मिल जाएंगे जिनमें छोटी सी उम्र में ही बच्चे गीत-संगीत, अभिनय, नृत्य कला, लेखन आदि क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं। अब इसी कड़ी में एक और बच्ची का नाम जुड़ गया है। इस बच्ची ने एक ऐसे क्षेत्र को चुना है जिसमें माना जाता है कि उसके लिए बहुत ज्यादा अध्ययन और अनुभव की जरूरत होती है। इस बच्ची ने छोटी सी उम्र में इन सब बातों को गलत साबित कर दिया है।दरअसल, इस बच्ची ने मात्र 5 साल में ही किताब लिख कर लेखन के क्षेत्र में अपना पहला कदम रख दिया है। इसके साथ ही ये भी बता दिया कि किताब लिखने के लिए ऊंची पढ़ाई और अनुभव की नहीं ,बल्कि लिखने की कल्पना और नजरिए की जरूरत होती है।

आइए जानते हैं इस पांच साल की लेखिका के बारे में…….
इस बच्ची का नाम बेला जे डार्क है। इसने किंडरगार्टेन में पढ़ते हुए दुनिया के सबसे कम उम्र की लेखिका होने का खिताब अपने नाम किया है। बेला ने पिछले साल ही एक किताब लिखी और इसके बारे में अपने माता-पिता को बताया। हालांकि, बेला के माता-पिता ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन जब उन्होंने बेला की लिखी किताब देखी तो बच्ची की क्रिएटिविटी और उसके नजरिए को देखकर हैरान रह गए। बेला की मां चेल्सी सायमे और पिता माइल्स डार्क अपनी बेटी की प्रतिभा को देखकर काफी हैरान और गर्व महसूस कर रहे हैं। बेला के माता-पिता के अनुसार, ये एक बच्चे की कहानी से प्रेरित है और इससे काफी कुछ सीखा जा सकता है। बेला ने जो कहानी लिखी थी वो एक खोई हुई बिल्ली की थी। इस किताब का नाम

कहानी में बताया गया है कि बिल्ली को अपनी मां के बिना ही बाहर चली जाती है और खो जाती है। कहानी बेहद भावुक भी करने वाली है, क्योंकि इसमें जीवन में मां की क्या भूमिका होती है, उसे भी शब्दों के माध्यम से बताया गया है। बेला की मां के अनुसार, वे किसी बुक फेयर में गए थे वहां एक किताब पब्लिश करने वाली एजेंसी ने इस कहानी को प्रकाशित करने में रुचि दिखाई। इसके बाद बच्चों की किताबें पब्लिश करने वाली Ginger Fyre Press की ओर से प्रकाशित किया गया है। इस किताब की सबसे खास बात है कि बेला ने ही इस किताब के सारे चित्रों को बनाया है। बेला के माता-पिता भी इस बात से बेहद खुश हैं कि उनकी बेटी की कहानी अब दुनिया के सामने

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