पैंगोंग झील का, क्यों है, इतना अधिक ,महत्व

  लद्दाख में पैगोंग झील पर चीन एक पुल बना रहा है. यह काम वहां कम से कम दो महीने…
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लद्दाख में पैगोंग झील पर चीन एक पुल बना रहा है. यह काम वहां कम से कम दो महीने से जारी है. नई सैटेलाइट तस्वीरों से साफ तौर पर पता चलता है कि चीन पैगोंग झील की सबसे पतले हिस्से में पुल बना रहा है. यह इलाका गलवान घाटी के बहुत पास है और वास्तविक नियंत्रण रेखा से 25 किलोमीटर अंदर चीन के हिस्से में है. इस पुल से झील के उत्तर और दक्षिण हिस्से जुड़ जाएंगे. इससे चीनी सेना की दोनों हिस्सों में पहुंच आसान हो जाएगा. इस वजह से यह झील एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है.

पैगोंग झील पूर्वी लद्दाख से पश्चिम तिब्बत फैली एक मशहूर झील है. आज इसका 50 प्रतिशत हिस्सा तिब्बत चीन में पड़ता है और 40 प्रतिशत हिस्सा भारत में पड़ता है. वहीं बाकी हिस्सा भारत और चीन के बीच बफर जोन में आता है. यह झील 134 किलोमीटर लंबी है. भारत में जो इस झील का करीब एक तिबाई हिस्सा है वह 135 किलोमीटर लंबा बूमरैंग के आकार का हिस्सा है जो 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है.

पैगोंग झील का सबसे चौड़ा हिस्सा 5 किलोमीटर का है जबकि सबसे पतला हिस्सा केवल 500 मीटर का है. चीन इसी हिस्से पर पुल बना रहा है. यह पुल चीनी सेना का करीब 140 से 150 किलोमीटर का रास्ता बचा सकेगा. यानि अब दोनों इलाकों में आने जाने में जहां चीनी सेना को 12 घंटे लगते थे अब केवल 3-4 घंटे में ही पूरी पहुंच बन जाएगी.

पूरी पैगोंग झील कुल मिला कर पांच उप झीलों से बनी है. पैंगोग त्सो, त्सो न्याक, रुम त्सो (जुड़वां झील) और न्याकसो, यह झील ग्लेशियर के पिघलने से बनती है जिसमें खारा पानी है. इसके बाद भी यह झील सर्दियों में पूरी तरह से जम जाती है. इसका इलाका सिंधु नदी के क्षेत्रसे अलग है.लेकिन माना जाता है कि यह कभी उसी का हिस्सा था.

मई 2020 में भारत और चीनके बीच सीमा टकराव का एक शुरुआत पैगोंग झील (Pangong Lake) के उत्तरी किनारा हिस्से से हुई थी. वहीं दक्षिणी किनारे पर टकराव अगस्त 2020 में शुरू हुआ था. भारतीय सेना ने उसी महीने दक्षिणी किनारे के बहुत सारी चोटियों पर कब्जा कर लिया था. तभी से चीन इसके आसपास के इलाके में सड़क निर्माण जैसे काम कर रहा है.

पैगोंग झील (Pangong Lake) का पूर्वी हिस्सा साफ पानी का है जबकि पश्चिम हिस्सा खारा है. इस झील में बहुत कम सूक्ष्म वनस्पति है. गाइड बताते हैं कि यहां मछलियां नहीं हैं. लेकिन फिर भी यहां पर्यटकों ने बतखें और गल जैसे जानवर देखे हैं. कुछ केकड़े और पुरानी जड़ी बूटियां भी झील के पास के दलदल में देखने को मिलती हैं.

पैगोंग झील विवादों से जरूर सुर्खियों में रहती है. लेकिन यह एक शानदार पर्यटन स्थल भी है. यहां प्रवासी पक्षीयों (Migratory Birds) का डेरा दिखाई देता है. झील का सबसे बड़ा आकर्षण उसका नीला रंग है. जो इसके सौंदर्य को चार चांद लगाने का काम करता है. बॉलीवुड फिल्म थ्री इडियट का क्लाइमेक्स यहीं शूट किया गया था. इस फिल्म से इस झील की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ था.

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