PM Modi Birthday – पीएम बनने तक, के जीवन की ,कुछ खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज 71वां जन्मदिन है. पीएम मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 में गुजरात के वडनगर में…
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज 71वां जन्मदिन है. पीएम मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 में गुजरात के वडनगर में हुआ था. वे बचपन में गुजरात के जामनगर के सैनिक स्कूल में जाना चाहते थे, लेकिन आर्थिक अभाव के कारण यह संभव ना हो सका.  स्कूल के दिनों में वह गुजरात के महेसाणा रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में अपने पिता की मदद किया करते थे. जहां 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने स्टेशन से गुजरने वाले सैनिकों को चाय पिलाई थी.

पीएम मोदी के बारे में कई बातें ऐसी हैं, जो देश के दूसरे  प्रधानमंत्रियों से उन्हें अलग करती हैं. वहीं उनकी बड़ी लोकप्रियता का रहस्य तो उनके विरोधी तक जानने की कोशिश करते रहते हैं. उनके शुरुआती  जीवन को देख कर कहना मुश्किल होता है कि वे कभी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं. उनके युवा जीवन से प्रधानमंत्री बनने तक के सफर में कई जानकारियां बहुत रोचक और आश्चर्य वाली भी लगती है.

जब पीएम 18 साल के थे तब उन्होने अपनी पत्नी सहित घर बार छोड़ कर संन्यास की राह निकल पड़े और अगले दो साल उत्तर और उत्तर पूर्व भारत की यात्रा करते रहे. इस दौरान वे स्वामी विवेकानंद के वेलूर मठ, असम में सिलिगुड़ी और गुवाहाटी, अल्मोड़ा के अद्वैत आश्रम और राजकोट के रामकृष्ण मिशन में भी रहे, वे किसी भी जगह लंबे समय तक नहीं टिक सके क्योंकि उन्होंने जरूरी कॉलेज शिक्षा नहीं ली थी.

पीएम मोदी खुद मानते हैं कि स्वामी विवेकानंद के जीवन का उनपर बहुत गहरा प्रभाव रहा. इसके बाद वे कुछ दिनों तक वडनगर में आए और फिर अहमदाबाद अपने चाचा के यहां चले गए, जो गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम की कैंटीन में काम करते थे. यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत  हुई.

1971 में वे दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतत्व में जनसंघ के सत्याग्रह में शामिल हुए थे जो उनकी पहली राजनैतिक गतिविधि थी. उस समय की इंदिरा गांधी सरकार ने बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी को खुला समर्थन नहीं दिया जिसकी वजह से मोदी को कुछ दिनों के लिए राजनैतिक कैदी के रूप में तिहाड़ जेल जाना पड़ा.1971 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्ण प्रचारक बन गए. आपातकाल में मोदी को आरएसएस की गुजरात लोक संघर्ष समिति का सचिव बनाया गया है. इसके बाद जल्दी ही आरएसएस पर प्रतिबंध लग गया और मोदी गिरफ्तारी से बचते हुए काम करने के लिए जगह बदलते रहे.

1990 में उन्होंने लालकृष्ण अडवाणी की रथ यात्रा की जिम्मेदारी संभाली, कुछ समय के लिए वे राजनीति से दूर रहे, लेकिन 1994 में वापसी की और उन्हें 1995 में गुजरात में  भाजपा की विधानसभा चुनावों में जीत का श्रेय भी मिला. इसके बाद वे बीजीपी के राष्ट्रीय सचिव बने.

गुजरात में 1998 के चुनाव में भाजपा की जीत का श्रेय भी उनके प्रयासों को दिया गया. अक्टूबर 2001 में वे केशुभाई पटेल के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री बने और फिर साल 2014 तक लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. उनके कार्यकाल में गुजरात का विकास मॉडल खूब चर्चा में रहा. साल 2014 में देश के प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने गुजरात सीएम का पद छोड़ दिया.

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