ट्रेन में हुआ 3 Idiots जैसा वाकया:सुनील बने ‘रेंचो’ – यात्री की करायी डिलीवरी

फिल्म 3 Idiots तो आपने देखी होगी. उसमें आमिर खान यानिरेंचो ने जो किया, कुछ वैसा ही सुनील प्रजापति नाम…
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फिल्म 3 Idiots तो आपने देखी होगी. उसमें आमिर खान यानिरेंचो ने जो किया, कुछ वैसा ही सुनील प्रजापति नाम के एक शख्स के साथ असल ज़िंदगी में घटा. उन्होंने चलती ट्रेन में एक महिला यात्री की डिलीवरी करायी. अब बच्चा और मां दोनों स्वस्थ हैं.

मामला शनिवार रात का है. जब सुनील ट्रेन से सागर, मध्यप्रदेश जा रहे थे. उनके कंपार्टमेंट में एक गर्भवती महिला किरण भी यात्रा कर रही थीं. उनके साथ उनका भाई और 6 साल की छोटी बेटी थी. दिल्ली के निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से मध्य प्रदेश संपर्क क्रांति रवाना होने के कुछ ही देर बाद किरण को लेबर पेन शुरू हो गया.

जान की चिंता
महिला का लेबर पेन और उसकी और उसकी कोख में पल रहे मासूम की चिंता सभी यात्रियों को होने लगी. लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी चलती ट्रेन में उस महिला यात्री किरण तक कोई सहायता समय पर नहीं पहुंच पाई. ऐसे में सुनील ने दोनों की जान बचाने के लिए खुद ही किरण की डिलीवरी करने का फैसला किया और उसकी डिलीवरी करा दी. किरण और उसका नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं. सुनील दिव्यांग हैं और दिल्ली में लैब टेक्नीशियन के तौर पर काम करते हैं. उन्हें ऑपरेशन का कोई अनुभव नहीं है.

सर्द अंधेरी रात में ट्रेन आगे बढ़ती जा रही थी और…

सुनील बताते हैं रात 8 बजे फरीदाबाद क्रॉस करने के बाद किरण को लेबर पेन शुरू हो गया. महिला की तकलीफ और उसकी जान की चिंता में सुनील भी परेशान हो उठे. बाकी यात्रियों को तो कुछ सूझ नहीं रहा था. लेकिन सुनील ने हिम्मत जुटाई. हालांकि मेडिकल के पेशे से जुड़े रहने के कारण उन्हें थोड़ी आसानी हुई. सुनील ने भी वही तरीका अपनाया जो रेंचो ने 3 इडियट्स में अपनाया था. दिल्ली में वो जिस अस्पताल में काम करते हैं वहां की डॉक्टर सुपर्णा सेन से उन्होंने फोन पर संपर्क किया. डॉक्टर सेन ने वीडियो कॉल पर सुनील को बताया कि डिलीवरी कैसे करनी है. सुनील ने उसके बाद मथुरा स्टेशन आने से पहले सहयोग के लिए TTE सहित एक अन्य महिला यात्री को भी बुला लिया.

बच्चा रोया नहीं…
सुनील बताते हैं कि डॉ सुपर्णा ने उन्हें तुरंत ब्लेड का इंतेज़ाम करने के लिए कहा. सुनील ने एक यात्री से ब्लेड लिया और अपने शॉल के टैग काटकर बच्चे को मां से जोड़ने वाली अम्बिलिकल कॉर्ड से बांधकर कॉर्ड काटी.सुनील बताते हैं कि उन्होंने रिस्क लेकर डिलीवरी तो करा दी लेकिन उनकी सांस अटक गयी जब जन्म के बाद बच्चा रोया नहीं. वो घबरा गए. उन्होंने तुरंत बच्चे को कंधे से चिपकाया. बच्चे की पीठ पर थपथपाया तो बच्चे ने किलकारी मारना शुरू कर दिया.

सुनील डर गए थे
सुनील प्रजापति भरी वो रात याद करके बताते हैं कि एक बड़ा चैलेंज था. महिला और उसके बच्चे की जान बचाना थी. एक यात्री के पास से एक ब्लेड मिल गया था.मेरे पास एक नया शॉल था.उसके टैग का मैंने प्रयोग किया.लेकिन डिलीवरी के बाद बच्चे का न रोना मेरे लिए डर का मसला बन गया था. लेकिन कहते हैं न कि अंत भला तो सब भला. जब तक डिलीवरी हुई मथुरा स्टेशन आ चुका था. नये शॉल में बच्चे को लपेटकर मथुरा स्टेशन पर RPF के जवानों को सौंपा. फिर उनकी मदद से महिला को स्थानीय मेडिकल सहायता प्रदान की गई. सुनील सोमवार को बच्चे के परिवार से मिलने सागर गए. वो नवजात को देखकर भावुक हो गए और उसे गोद में उठाकर गले से लगा लिया.

सोर्स -hindi.news18.com

News Desk

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