दुनिया भर में महंगाई आसमान छू रही है. घरेलू सामान से लेकर कंप्यूटर तक की कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही है. इसमें कोविड19 महामारी की बड़ी भूमिका है. महामारी के कारण लगे लॉकडाउन और अन्य आर्थिक प्रतिबंधों का असर हुआ है. लेकिन क्या इस असर को रोका जा सकता है.
दुनिया के अधिकांश देशों में अब भी महंगाई का जो सबसे बड़ा, सीधा और प्रभावी कारण है वह ईंधन की कीमतें हैं इस समय पूरी दुनिया में जो महंगाई देख रही है उसके पीछे पेट्रोल डीजल की कीमतों में उछाल ही है. महामारी की शुरुआत में तेल की मांग कम हो गई थीं, लेकि उसके बाद से अब तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसा अमेरिका, ब्रिटेन, ईयू समेत सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भी हो रहा है. एशिया में भी मांग बहुत तेजी से बढ़ी है.
रोजमर्रा की काम घरेलू चीजों की कीमतें आसमान छूने लगी है. ऐसा महामारी के दौरान ज्यादा देखने को मिला है. लॉकडाउन के दौरान ग्राहक घर में बैठा रहा और बाजार बंद थे. मांग और आपूर्ति दोनों ही बहुत कम हो गए थे. वहीं रेस्तरां और भोजन संबंधी उद्योग तो पूरी तरह से ठप्प हो गया था. दूसरी तरफ कारखाने आदि बंद हो गए, कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो गई. प्लास्टिक, कंक्रीट, स्टील आदी की कीमतों में तेजी दिखने लगी. नतीजा यह हुआ की हर चीज की मंहगी होने लगी.
तेल की कीमतों की वजह से ही नहीं दुनिया भर शिपिंग कंपनियों को महामारी में एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा. लॉकडाउन की वजह से माल ढुलाई बं द हो गई थी. लेकिन महामारी के बाद माल ढुलाई तंत्र पर दबाव पड़ा गया. इसका सीधा दबाव रीटेलर पर पड़ा ही , दुनिया के कई अर्थव्यवस्थाएं तक चरमरा गईं. इसका सबसे अच्छा उदारण ब्रिटेन है जहां पिछले साल के उत्तरार्द्ध में सप्लाई चेन चरमराने से अफरा तफरी की स्थिति बन गई थी. ऐसा केवल शिपिंग कंपनियों के साथ ही नहीं हवाई और सड़क परिवहन में भी हुआ.
महामारी में बहुत से लोगों ने अपना रोजगार गंवा दिया. वहीं कई लोगों ने अपने नौकरियां गंवाई. लेकिन नौकरी छोड़ने वालों की भी कमी नहीं रही. इसकी वजह से अब कंपनियों को भर्तियां करने में परेशानी हो रही है. इसके कारण अब भत्तों के इजाफे की नौबत आ गई है. कंपनियां नए ऑफर दे रही हैं. यह सब कामगारों की मांग बढ़ने से हो रहा है. यह सब आने वाले समय में और बढ़ने ही वाला है.वहीं कामगारों की कमी फैक्ट्री मालिकों पर भी दबाव बना रही है.इसका नतीजा महंगाई के रूप में ही देखने को मिल रहा है.
हैरानी की बात लग सकती है लेकिन यह सच है कि जलवायु (Climate) से निपटना दिन ब दिन महंगा होता जा रहा है.दुनिया (World) में असीम मौसम के कारण हो रहे आर्थिक नुकसान का असर महंगाई (Inflation) पर हो रहा है. मौसम की खराबी अब जहाजों के द्वारा हो रही आपूर्ति में ज्यादा बाधक हो रही है. दुनिया भर में तेल की आपूर्ति में कई तूफान बाधक बने थे. मैक्सिको की खाड़ी में ऐसा ही हुआ था. अमेरिका के टेक्सास की फैक्ट्रियों में भीषण शीतकालीन तूफान ने दुनिया में माइक्रोचिप की आपूर्ति को बाधित किया है जिससे दुनिया अभी तक नहीं उबर सकी है. ये केवल कुछ उदाहरण हैं.