उद्योगपति आनंद महिंद्रा को सोमवार को व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में उनके योगदान और काम के लिए भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आनंद महिंद्रा को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में पुरस्कार से सम्मानित किया है।
लेकिन आनंद महिंद्रा मानते हैं कि वो इस पुरस्कार के योग्य नहीं हैं। प्रतिष्ठित पुरस्कार पर महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह के अध्यक्ष ने कहा कि वह अन्य प्राप्तकर्ताओं की तुलना में ‘वास्तव में खुद को अयोग्य महसूस करते हैं।’
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने जहां लोगों को पद्म पुरस्कारों के लिए चुने जाने के तरीके में लंबे समय से बदलाव लाने के लिए सरकार को धन्यवाद दिया, वहीं उन्होंने कहा कि वह उन लोगों में शामिल होने के योग्य नहीं हैं जिन्होंने समाज के सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
महिंद्रा ने पद्म पुरस्कारों के लिए सरकार की सराहना करने के लिए ट्वीट किया, ‘इस सरकार ने पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को लेकर एक बहुत ही अहम बदलाव किया है।’ उन्होंने कहा कि अब, मुख्य रूप से जमीनी स्तर पर समाज के सुधार में मौलिक योगदान देने वाले व्यक्तियों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। उन्होंने कहा कि मैं वास्तव में उस श्रेणी में शामिल होने के योग्य महसूस नहीं कर रहा था।
महिंद्रा ने भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट द्वारा साझा किए गए एक पोस्ट को रीट्वीट किया, जो कर्नाटक की एक पर्यावरणविद् और पद्म श्री विजेता तुलसी गौड़ा के बारे में था। पर्यावरणविद गौड़ा ने 30,000 से अधिक पौधे लगाए हैं और वन विभाग की नर्सरी की देखभाल में तल्लीन हैं। 77 वर्षीय गौड़ा छह दशकों से अधिक समय से पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में शामिल हैं।
इसके साथ ही आनंद महिंद्रा ने उन्हें बधाई देने वालों का भी शुक्रिया अदा किया और उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार के लिए बधाई दी। कई प्रशंसक आनंद महिंद्रा की विनम्रता की तारीफ कर रहे हैं।
This Govt has made a long-overdue, transformational shift in the texture of the Padma Awards recipients. Now, the focus is largely on individuals making seminal contributions to the improvement of society at grassroots levels. I truly felt undeserving to be amongst their ranks. https://t.co/jor34tqx1w
— anand mahindra (@anandmahindra) November 9, 2021