मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह ने जो मुकाम हासिल किया है, वह भारतीय वायुसेना में अभी तक कोई भी अफसर नहीं कर सका है. पांच सितारा पद वाले मार्शल ऑफ द एयर फोर्स को हासिल कर पाने वाले एक मात्र व्यक्ति थे. यह पद थल सेना में फील्ड मार्शल के समकक्ष माना जाता है. उन्हें 1965 की जंग में भारतीय वायुसेना की बहादुरी और निर्णयाक नेतृत्व के लिए हमेशा याद किया जाता रहा है. वे देश की वायु सेवा करने वाले सबसे बुजुर्ग सैनिक के तौर भी जाने जाते हैं.
अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को अविभाजित पंजाब के लयालपुर में हुआ था. 19 साल की उम्र में ही क्रैनवेल के द रॉयल एयरफोर्स कॉलेज में प्रवेश किया इसके बाद 1939 में अपनी स्तातक पढ़ाई पूरी कर एक पायलट अधिकारी के रूप में नियुक्त हुए. उन्होंने 1944 में भारतीय वायुसेना की नंबर एक स्वाड्रन का अराकान अभियान में नेतृत्व किया और उसी साल फ्लाइंग क्रास से सम्मानित भी हुए.
16 सितंबर 2017 को सिंह को दिल का दौरा पड़ने की वजह से अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, यहां उनकी हालत बहुत गंभीर बताई गई. उसी दिन उन्होंने अंतिम सांस ली और 98 वां साल उनके जीवन का अंतिम वर्ष हो गया. इससे पहले 14 अप्रैल 2016 में पश्चिम बंगाल के परगना बेस का नाम उनके सम्मान में एयर फोर्स स्टेशन अर्जन सिंह रखा गया.
अर्जन सिंह को फरवरी 1945 में केरल के एक रिहायशी इलाके के बहुत से नीचे से उड़ान भरने के आरोप में कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ा. इस मामले में उन्होंने अपना बचाव यह कहते हुए किया कि वे एक ट्रेनी पायलट दिलबाग सिंह का मनोबल बढ़ाने के लिए कोशिश ऐसा कर रहे थे. बाद में यही दिलबाग सिंह भारत के एयर चीफ मार्शल भी बने.
1947 में भारत की आजादी के दिन अर्जन से रॉयल इंडियन एयर फोर्स (RIAF) के पहले फ्लाई पास्ट का नेतृत्व किया जिसने दिल्ली के लाल किले के ऊपर से उड़ान भरी थी. उस समय उन्होंने ग्रुप कैप्टन के रूप में अंबाला के एयर फोर्स स्टेशन की कमान संभाली थी.
15 जुलाई 1969 में रिटायर होने के बाद वे एक राजनियक, नेता और भारत सरकार के सलाहकार के रूप में कार्यरत रहे. वे स्विट्जरलैंड, होली सी, लीचेन्स्टीन में भारत के राजदूत रहे और फिर कीनिया में हाई कमिश्नर के रूप में भी सेवारत रहे. उन्होंने 1989 से 1990 तक दिल्ली के उपराज्यपाल के तौर पर भी अपने सेवाएं दीं.
जनवरी 2002 में अर्जन सिंह को भारतीय वायुसेना का मार्शल बनाया गया. इसके बाद जब 27 जुलाई 2015 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की अचानक मौत हुई तब उनका शरीर दिल्ली लाया गया. उन्हें श्रद्धांजलि देने अर्जन सिंह भी पहुंचे थे. अर्जन उस समय व्हील चेयर पर थे, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने खड़े होकर डॉ कलाम को सेल्यूट देकर श्रद्धांजलि दी.