देश में कोविड-19 के हालात से निपटने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी को पांच उपाय सुझाते हुए पत्र लिखा और इस बात पर जोर दिया है कोविड-19 से मुक्त होने के लिए दवाओं की आपूर्ति और टीकाकरण बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा.मनमोहन सिंह ने हमें कितने प्रतिशत आबादी को टीका लग चुका है,यह देखना होगा नाकि कुल संख्या को देखना चाहिए
उन्होंने ये सुझाव भी दिए कि दवा निर्माताओं के लिए जरुरी रूप से लाइसेंसिंग के प्रावधान लागू किए जाने चाहिए , मुझे याद आता है कि एचआईवी/एड्स की बीमारी से निपटने के लिए पहले ऐसा हुआ था.और टीकाकरण के लिए लोगो की आयु में छूट देनी चाहिए कि 45 साल से कम उम्र के ऐसे लोगों को भी टीके लग सकें.
सिंह ने अपने पत्र में लिखा, ‘‘कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई में टीकाकरण बढ़ाना अहम होने चाहिए.हमारे लिए कितने प्रतिशत का टीकाकरण हो चुका है, यह महत्वपूर्ण है.हमें दिलचस्पी नहीं रखनी चाहिए कि कितने लोगों को टीका लग चुका है
पूर्व प्रधानमंत्री ने खत में लिखा की भारत की आबादी में से छोटे से हिस्से का ही टीकाकरण हुआ है. हम इसमें सही नीति और सही दिशा में बेहतर तरीके से से आगे बढ़ सकते है उन्होंने कहा, हमें महामारी से लड़ने के लिए बहुत सी चीजें करनी होंगी, लेकिन इस प्रयास का बड़ा हिस्सा टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूत करने का होना चाहिए.
‘सिंह ने अपने पत्र में अनेक सुझाव दिये. उन्होंने कहा कि राज्यों को टीकाकरण के लिए कर्मियों की श्रेणी तय करने में कुछ ढील मिलनी चाहिए, उनोने कहा की स्कूल शिक्षकों,टैक्सी चालकों, बस ,नगर निगम और पंचायत कर्मचारियों को ,कोर्ट जाने वाले वकील काम करने वाले श्रेणी में सूचीबद्ध करना चाहते हैं ऐसे में 45 साल से कम होने पर भी टीका लगाया जा सकता है.
सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार को अगले छह महीने के टीकों की खुराक के ऑर्डर और आपूर्ति के बारे में जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.हम इस समय में एक लक्ष्य तक टीकाकरण चाहते हैं तो पहले ही पर्याप्त ऑर्डर देने होंगे जिससे हम उत्पादक आपूर्ति के तय कार्यक्रम के अनुसार काम कर सकें.
उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार आपत्कालीन स्थिति के लिए 10 % खुराक रख सकती है राज्यों को संभावित उपलब्धता का स्पष्ट संकेत होना चाहिए जिससे वह अपनी रणनीति बना सके
सिंह ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे बड़ा टीका निर्माता बनकर उभरा है सरकार को आपात स्थिति में टीका निर्माताओं को पैसे के साथ दूसरी रियायतें देकर उनकी उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाकर उनका समर्थन करना चाहिए.